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Lalitpur News: को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में होगा माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम

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तीन से छह वर्ष के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने में माताओं की बताई जाएगी भूमिका
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की देखभाल के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने में माताओं की भूमिका बताने के लिए अब को-लोकेटेट आंगनबाड़ी केंद्राें में माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिसमें करीब 258 को-लोकेटेट विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी शामिल हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के करीब 50 से 55 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में इन पंजीकृत बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है। जिसमें खेल-खेल में पढ़ाई कराई जाती है। बच्चों को अक्षर ज्ञान, गिनती, रंगों और आकारों की पहचान के साथ भाषा और गणित की शुरुआती जानकारी दी जाती है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तीन से छह वर्ष आयुवर्ग के बच्चे सबसे अधिक अपनी माता से भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए बच्चों के समग्र विकास के लिए उनकी प्रथम शिक्षिका माताओं को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और सीखने के अवसर देने के लिए जनपद की को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें माताओं को बच्चों की देखभाल के साथ-साथ औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने में उनकी भूमिका से अवगत कराते हुए प्रेरित किया जाएगा। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चे, उनके अभिभावक के रूप में माताएं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक, नोडल शिक्षक, को-लोकेटेड आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, ग्राम सभा के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित लोगों को बुलाया जाएगा। माता उन्मीखुकरण कार्यक्रम कराने के लिए जिले में तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। बीएसए रत्नेश कुमार ने बताया कि शासन के आदेश पर को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके लिए सभी को दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।
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उन्मुखीकरण में ये गतिविधियां भी होंगी
- माताओं के साथ निर्धारित विषयों पर उदाहरण के साथ चर्चा होगी।
- आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित, उपस्थित बच्चे माताओं के समक्ष सीखी गई गतिविधियों का प्रदर्शन करेंगे।
- माताओं की सहायता से स्थानीय कला की सामग्री को समूह में बैठकर बनाया जाएगा।
- तैयार की गई सामग्री के दो प्रतिरूप आंगनबाड़ी केंद्र व बाल वाटिका में संरक्षित रखा जाएगा।
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