घर में ही भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव मनाते हुए श्रद्वालु
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महरौनी/ ललितपुर। मोक्ष सप्तमी पर मुनिश्री यादवेंद्र सागर ने कहा कि तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का चरित्र क्षमा की प्रतिमूर्ति है। उनके जन्म के 10 भवों से कमट का जीव प्रत्येक भव में क्रोध, हिंसा की पराकाष्ठा पर पहुंचा, परंतु प्रभु पार्श्वनाथ हर भव में उसे क्षमा करते गए।
उन्होंने कहा कि मोक्ष की प्राप्ति का एकमात्र उपाय है, मोह का परित्याग। जिस प्रकार भगवान पार्श्वनाथ ने अनेक उपसर्गों को सहन करते हुए कठिन तपस्या की एवं मोह का त्याग कर अपने जीवन में समता का निर्माण किया और मोक्ष को प्राप्त किया, उसी प्रकार हर श्रावक को भी मोह छोड़ना पडे़गा, तभी आत्मा का कल्याण होगा। मोक्ष सप्तमी पर जैन धर्मावलंबियों ने घरों में रहकर भगवान की पूजा अर्चना की। टेलीविजन चैनल के माध्यम से मुनिश्री सुधासागर महाराज के दिशा-निर्देश में श्रद्धालुओं ने पूजन किया तथा श्री सर्वतोभद्र अतिशय तीर्थ में भगवान पार्श्वनाथ का मस्तकाभिषेक किया गया।
उधर, अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन परिषद के आह्वान पर भक्ति भाव से घरों में भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव मोक्ष सप्तमी मनाई गई। कोविड-19 के चलते हुए पारस व जिनवाणी चैनल के माध्यम से भगवान के इस कार्यक्रम को जैन धर्मावलंबियों ने ऑनलाइन देखकर घरों में पूजन किया। परिषद के महामंत्री अजय जैन ने बताया कि भगवान पार्श्वनाथ के पूजन से केतु ग्रह की शांति होती है, इसलिए उन्हें कष्ट निवारक चिंतामणि पारसनाथ भी कहा जाता है। सभी दिगंबर जैन मंदिरों में पारसनाथ भगवान की मूर्ति अवश्य होती है। श्री सिद्ध क्षेत्र पावागिरी में (पवा तालबेहट) में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजमान है। इस मौके पर रामप्रकाश जैन, निर्मल, अजय अलया, रवींद्र जैन, मनमोहन, राजू जैन, अजय जैन, आकाश जैन, निर्मला जैन, संगीता, वीणा जैन, दिनेश जैन आदि उपस्थित रहे।