ललितपुर। होली के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे मिलन समारोह लोगों में मिठास घोलने का काम कर रहे हैं। अब राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों में इसका चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। आयोजनों में लोग एक-दूसरे को अबीर, गुलाल तो लगाते ही हैं, साथ ही फाग गायन, हास्य गीत जैसे कार्यक्रम भी समारोह के हिस्सा होते हैं।
बदले दौर में लोगों में वैमनस्यता बढ़ती जा रही है, जिससे होली की कई परंपराओं का दायरा सिमटता जा रहा है। होली पर पहले विविध कार्यक्रम होते थे। इनमें होलिका दहन के अगले दिन गोबर व कीचड़ की होली, दूसरे दिन भाई दूज व रंग पंचमी तक रंग की होली खेली जाती रही है। वर्तमान में होली पर्व की कई पुरानी परंपराएं कुछ हिस्सों तक सीमित रह गई हैं। फागों का भी गायन जगह-जगह होता था, अब उनकी टोलियां भी कम हो गई हैं। होली मिलन समारोहों की बाढ़ तब आ जाती है, जब कोई चुनाव नजदीक होता है।
कमोवेश यही स्थिति हुरियारों की टोलियों की हो गई है। अब होली मनाने का तरीका बदलता जा रहा है। राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन होली मिलन समारोह करने लगे हैं। इनमें लोगों की भीड़ जुटती है। कोई मंदिर परिसर में तो पार्क में समारोह आयोजित करता है। बुंदेलखंड विकास सेना ने दस मार्च को सुबह दस बजे कंपनी बाग में आयोजन रखा है। इसमें नहास्य व्यंग्य, कॉमेडी, आर्केस्ट्रा, बुंदेली व्यंजन को शामिल किया है। वन रक्षक संघ ने सात मार्च को सुबह 11 बजे वन विश्राम गृह में होली मिलन समारोह का आयोजन किया है।
भारत में पर्व एवं महोत्सव संस्कार, संस्कृति एवं परंपराओं को सजोने के साथ समाज के सभी लोगों को एकसूत्र में बांधने का माध्यम है। इनमें रक्षाबंधन, दशहरा, दीवाली व होली पर्व है। हजारों वर्षों से ये पर्व राष्ट्रीय एकता, अखंडता का संदेश देने के साथ सांस्कृतिक ताने- बाने को संजोए हुए हैं। सतयुग से प्रारंभ हुई होली महोत्सव की परंपरा आज भी कायम है।स्त्रत्त् ये आयोजन समाज के लोगों को एकत्रित कर सामाजिक समरसता एकता का संदेश देते हैं।
- डा. ओमप्रकाश शास्त्री
विभागाध्यक्ष संस्कृत, नेहरू महाविद्यालय
होली मिलन जैसे कार्यक्रमों में लोग आपसी भेदभाव िभुलाकर शामिल होते हैं। इससे सामाजिक समरसता कायम होती है। होली सही मायनों में समाज में एकता, अखंडता, परंपरा एवं मर्यादाओं की रक्षा, भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को सजाने का माध्यम है।
-राजेश लिटौरिया, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
यह त्योहार मिलन और दोस्ती का माहौल बनाकर हर किसी के दिल में खुशियां भर देता है। इसी से जिंदगी जीने का नया अंदाज मिलता है, औरों के दुख-दर्द को भी बांटता है। इसके अलावा बिखरती मानवीय संवदेनाओं को जोड़ा जाता है। ऐसे आयोजनों से सामाजिक समरसता की भावना प्रसारित होती है। इससे राष्ट्रीय एकता को भी बल मिलता है।
- अजमल खान, जिलाध्यक्ष पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ
हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में होली मिलन जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बिखरती मानवीय संवदेनाओं को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से सामाजिक समरसता की भावना प्रसारित होती है। इससे राष्ट्रीय एकता को भी बल मिलता है।
- विनोद निरंजन, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
होली ऐसा रंग- बिरंगा त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। प्यार भरे रंगों से भरा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन खोलकर भाई-चारे का संदेश देता है। होली के दौरान होने वाले होली मिलन समारोह समाज में सतरंगी समरसता का संदेश देता है। सही मायनों में होली जैसे सतरंगी त्योहार को होली मिलन जैसे आयोजन ही जिंदा किए हुए हैं। इसे मनाने के पीछे लोगों की एक मजबूत सांस्कृतिक धारणा भी है। यह आयोजन हमें भेदभाव और नफरत जैसी बुराइयों से दूर रहने की सलाह देता है।
- डा. सुनील संचय, जैन शास्त्रों के जानकार
हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में होली मिलन जैसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। होली का त्योहार मिलन और दोस्ती का माहौल बनाकर हर किसी के दिल में खुशियां भर देता है। सभी को बिना किसी झिझक कर होली का त्योहार मनाना चाहिए।
- नीरज चतुर्वेदी, जिलाध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
होली का त्योहार हमारे देश में विशेष महत्व रखता है। पर्व पर लोग पुरानी बुराइयां भूलकर एक- दूसरे से गले मिलते हैं और लोकगीत, लोक नृत्य, फाग जैसे विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन होते आए हैं, लेकिन होली का यह पारंपरिक रूप आजकल होली मिलन समारोह तक ही सिमटकर रह गया है। होली मिलन समारोह समाज में सतरंगी समरसता घोलने का काम कर रहे हैं।
- हेमंत तिवारी, जनपदीय मंत्री संघर्ष समिति उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
भारतीय ूत्योहारों में होली खुले मन से खेलने का पर्व है। लेकिन, आपाधापी के जीवन और समय की अनुपलब्धता में होली पर्व के प्रति उत्साह कम होता जा रहा है। वैमनस्यता बढ़ने से लोग अब हुड़दंग वाले कार्यक्रमों से बचने लगे हैं। अब होली मिलन जैसे समारोहों में लोग शामिल होकर त्योहार का आनंद व उत्साह के साथ बिना किसी हंगामे के उठा लेते हैं।
- ह्देश गोस्वामी, शिक्षक