जिला अस्पताल प्रशासन का एक गरीब मरीज के साथ अमानवीय व्यवहार करने का मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती मरीज को डाक्टरों ने केवल इस बात पर बाहर निकाल दिया कि उसकी जांच में टीबी की पुष्टि हुई थी। इसके बाद वृद्ध महिला अपने बीमार पुत्र को लेकर एक दिन सड़क किनारे मदद की गुहार लगाती रही। बूढ़ी मां की राहगीरों से लगाई गई गुहार पर पसीजे कुछ लोगों ने फिर से युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से चिकित्सकों ने एंबुलेंस से उसको झांसी भिजवाया।
थाना नाराहट क्षेत्र के ग्राम पटना निवासी रहीश सिंह लोधी (30) को उसकी मां जानकी द्वारा 28 अक्टूबर को गंभीर बीमारी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पहले उसकी मलेरिया व डेंगू की जांच कराई गई। इसके बाद टीबी की जांच कराई गई। रिपोर्ट में मरीज को टीबी की पुष्टि हुई। रहीश की हालत और भी अधिक बिगड़ने लगी और उसको खून की उल्टी व दस्त आना शुरू हो गया। यह देख वार्ड में तैनात जिला अस्पताल के स्टाफ ने भर्ती रहीश को 02 नवंबर की सुबह अस्पताल से बाहर निकाल दिया। इससे निराश महिला अपने पुत्र को लेकर टैक्सी से अपने गांव ले जा रही थी तो रास्ते में स्थानीय नेहरू महाविद्यालय के सामने ही रहीश को उल्टी होना शुरु हो गई, जिससे टैक्सी चालक ने उसको वहीं उतार दिया। इसके बाद जानकी वहीं सड़क के ही किनारे चादर बिछाकर उस पर अपने बीमार पुत्र को लिटा दिया और राहगीरों से मदद की गुहार लगाने लगी। वह कई घंटों तक सड़क पर ही मदद की आस में पड़ी रही। इसके बाद शाम को कुछ राहगीर उसकी मदद से लिए रुके । सिविल लाइन निवासी शिवम जैन जोनी ने 108 एंबुलेंस पर फोन लगाया, इसके बाद करीब एक घंटे तक कोई भी एंबुलेंस नहीं आई। वहां मीडिया कर्मी भी वहां पहुंच गए। इसके बाद मीडिया कर्मियों द्वारा उसको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डाक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार करके उसको बृहस्पतिवार की सुबह मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया।
जनपद में संक्रामक रोगियों के लिए नहीं वार्ड की व्यवस्था
जिला अस्पताल में संक्रामक रोगियों को भर्ती करने के लिए कहीं पर भी वार्ड की व्यवस्था नहीं है। इसी बात का हवाला देते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने रहीश को इसलिए झांसी रेफर कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार मिलकर टीबी से ग्रसित लोगों के तमाम प्रयास कर रही है। हजारों व लाखों रुपये तक दवाओं को मरीजों के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही हैं। शासन ने जनपद में टीबी रोग के लिए जिला मुख्यालय पर एक अलग से विभाग स्थापित किया है व टीवी के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तरीय अधिकारी की तैनाती भी की है। इसके बावजूद वर्षों बीत गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों के लिए संक्रामक वार्ड उपलब्ध नहीं करा पाया है। यह एक बड़ी वजह हो सकती है, टीवी के मरीजों की मौत की।