- सात विभाग की ओपीडी में आठ प्रोफेसर मिले गायब
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर उपचार मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। यहां पर अधिकांश विभागों की ओपीडी सीनियर रेजीडेंट व जूनियर रेजीडेंट के सहारे संचालित हो रही है। इनमें प्रोफेसर अधिकांश समय में गायब रहते हैं। यह हाल मंगलवार को दोपहर डेढ़ बजे देखने को मिला, यहां पर आठ ओपीडी में दो में प्रोफेसर नजर आए। इसके अलावा अन्य ओपीडी में महज एसआर व जेआर उपचार करते नजर आए। ऐसे में उपचार की सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मेडिकल कॉलेज की हकीकत जानी। दोपहर एक बजकर 35 मिनट पर नेत्र विभाग की ओपीडी बंद नजर आई। इसमें चिकित्सक के आने व जाने का बोर्ड तक नजर नहीं आया। यहां पर विभागाध्यक्ष डॉ. रुपाली गायब मिलीं। दंत रोग विभाग की ओपीडी में दो प्रोफेसर की जगह महज एक ही नजर आईं। यहां पर सहायक आचार्य डॉ. दीपिका कुमारी जैन गायब मिलीं। ईएनटी विभाग में ओपीडी दिन विभागाध्यक्ष नम्रता द्विवेदी व एसआर डॉ.श्रद्धा गुप्ता का था। इसमें विभागाध्यक्ष ओपीडी में नहीं मिलीं। बाल रोग विभाग में एक भी प्रोफेसर व चिकित्सक नजर नहीं आए। यहां पर डॉ. आलोक तिवारी व डॉ. डीवी सिंह ओपीडी में नहीं थे, महज एक अन्य चिकित्सक उपचार कर रहे थे। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में सहायक आचार्य डॉ. पवन सूद व एक एसआर डॉ. लाल व डाॅ. राजेश उपचार करते नजर आए। अन्य प्रोफेसर चिकित्सक गायब मिले। ऑर्थो विभाग की ओपीडी में विभागाध्यक्ष का दिन था, जो ओपीडी में नहीं थे, यहां पर सहायक आचार्य डॉ. मनोज कुमार व वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. निर्भय सिंह उपचार कर रहे थे। इसमें डॉ. एमसी गुप्ता ओपीडी थी, लेकिन ओपीडी से गायब रहे। वहीं सर्जरी विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक गुप्ता व सहायक आचार्य डॉ. मोहित जैन नहीं मिले। यहां पर महज एसआर डॉ. प्रतीक जैन उपचार करते नजर आए।
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ओपीडी कक्ष के बाहर नहीं लगे बोर्ड
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की अनदेखी कहें या कमियों को छुपाना। किसी भी ओपीडी के बाहर न तो यूनिट का नाम लिखा है और न ही चिकित्सक का नाम व पदनाम और ओपीडी व ओटी दिन तक नहीं लिखा है। इसके चलते भोले-भाले मरीजों को जानकारी नहीं हो पाती है। उपचार कराने के लिए भटकते रहते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में गर्मियों में प्रोफेसरों के अवकाश शुरू हो जाते हैं। हालांकि सभी विभागों के प्रोफेसरों को रोका जाएगा। ओपीडी खाली नहीं होगी।
- डॉ. डीनाथ, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज