प्रदेश सरकार द्वारा अवैध बूचड़खानों और मीट की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के बाद व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। मांस का व्यापार शहर में पूरी तरह ठप हो गया है। जिले में एक भी बूचड़खाने का लाइसेंस नहीं है और न ही विक्रेताओं के पास मीट बेचने का लाइसेंस है। कुछ व्यापारियों के पास लाइसेंस थे, उनका 2013 से नवीनीकरण नहीं करवाया है।
प्रदेश सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा बिना लाइसेंस के चल रही मांस की दुकानों को भी बंद करने का निर्णय लिया है। जिले में एक भी दुकान का लाइसेंस नहीं है। 2012 में सिर्फ चार दुकानों के ही लाइसेंस लिए थे। लेकिन इसके बाद इनका नवीनीकरण नहीं करवाया गया। बिना लाइसेंस के चल रही दुकानों को बंद करवाने के फैसले से व्यापारियों को रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। व्यापारी अधिकारियों के पास दुकानें शुरू करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन द्वारा गाइड लाइन न आने और मानक के अनुरूप दुकानें न होने के कारण लाइसेंस नहीं दिए जा रहे हैं।
एक महीने से दुकानें नहीं खोल पा रहे हैं। इस कारण आजीविका का संकट पैदा हो गया है। एक रुपये की भी आमदनी नहीं हो पा रही है। पुस्तैनी धंधा है। समझ में नहीं आता क्या करूं।
बद्दू, कुरैशी
मैने 2013 में लाइसेंस का नवीनीकरण करवाया था। फिर जरूरत नहीं पड़ी तो नहीं करवाया। नवीनीकरण के लिए कई बार कोशिश कर चुका हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
असलम कुरैशी
प्रशासन ने दुकानें बद करवाने के लिए तो आदेश जारी कर दिया, लेकिन हम लोगों के बारे में नहीं सोचा। अब तो पुलिस भी परेशान करने लगी है। कोई तो सुनवाई हो।
हबीब कुरैैशी
अधिकारियों के पास लाइसेंस के लिए जा रहे हैं तो वहां सुनवाई नहीं हो रही है। लाइसेंस न होने के कारण दुकानें नहीं खोल पा रहे हैं। कोई तो रास्ता निकाला जाए।
कादिर कुरैशी
नये सिरे से कोई गाइड लाइन नहीं आई है। जनसेवा केंद्र और लोकवाणी केंद्र से जारी हुए सभी लाइसेंस पर रोक लगा दी है। पुरानी गाइड लाइन के अनुसार लाइसेंस के लिए नगर पालिका और पशु चिकित्सा अधिकारी की एनओसी आवश्यक है। इसके अलावा मानक के अनुसार दुकानें भी होनी चाहिए।
केएन त्रिपाठी, मुख्य खाद्य अधिकारी