यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आते ही सबसे पहला फरमान अवैध बूचड़खानों और अवैध मांस की दुकानों को बंद कराने का दिया था। योगी के निर्देश पर जहां पूरे सूबे में मांस की अवैध दुकानें बंद हो गई हैं, वहीं जिले में प्रशासन अवैध रूप से मांस का कारोबार करने वालों पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखा सका। मांस की अवैध दुकानें बंद कराने के लिए शासन के निर्देश पर डीएम ने टीम बनाई, बैठक भी की, लेकिन एक्शन नहीं किया। वहीं, भाजपा के नेताओं को भी मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन कराने की चिंता नहीं हुई है।
जिले में न तो स्लाटर हाउस है और न ही एक भी मीट की ऐसी दुकान है जो मानक पूरे कराते हुए अपना लाइसेंस बनवाए हुए हो। इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से बिना सुरक्षा मानक अपनाए पशुओं का वध किया जा रहा है। आलम यह है कि शहर के मुख्य मार्गों, धार्मिक स्थलों के आसपास मीट की दुकानें बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं। जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने शासनादेश मिलते ही टीम गठित की थी, इसमें अध्यक्ष स्वयं जिलाधिकारी हैं और अन्य सदस्यों में एसपी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, डीपीआरओ, सीएमओ, अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड झांसी समेत नगर पालिका व तीनों नगर पंचायतों महरौनी, पाली व तालबेहट के अधिशासी अधिकारी शामिल हैं। इस विशेष समिति को गठित हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अब तक शहर में खुलेआम संचालित हो रही मीट की दुकानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। टीम ने बंद कमरे में बैठक कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
27 मार्च को इस समिति की बैठक सदर एसडीएम रमेश चंद्र तिवारी की अध्यक्षता में हुई थी, इसमें शहर के मीट व्यापारियों को बुलाकर उन्हें मानकों का पाठ पढ़ाया गया था। साथ ही सख्त निर्देश दिए थे कि बिना रजिस्ट्रेशन के दुकानें न चलाएं। लेकिन, निर्देशों और मानकों को धता बताते हुए अभी भी यह दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं।
ये हैं मानक और नियम
मीट की दुकान का रजिस्ट्रेशन शुल्क से अधिक जटिल उसके मानक व नियम है। व्यापारी की यदि वार्षिक आय 12 लाख से कम है तो रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र 100 रुपए प्रतिवर्ष लगता है, इससे अधिक वार्षिक आय पर दो हजार रुपए वार्षिक शुल्क लगाता है। लेकिन रजिस्ट्रेशन बनवाने के लिए क्षेत्रीय पार्षद की अनुमति व नगर पालिका से एनओसी जारी कराना जरूरी है। दुकान खुले स्थान पर न हो और आसपास रहने वाले लोगों को कोई आपत्ति न हो इसके बाद ही नगर पालिका एनओसी जारी करता है। साथ ही पक्की दुकान, तीन फीट ऊंचा प्लेटफार्म, टाइल्स लगे हों, पानी पर्याप्त उपलब्ध हो, वेस्ट मटेरियल रखने के लिए कंटेनर हो तथा डीप फ्रीजर उपलब्ध होने पर ही मानक पूरे होते हैं।
प्रतिबंधित क्षेत्र में खुलेआम बिक रहा
शहर में लगभग समस्त दुकानें सार्वजनिक स्थलों व शहर के मुख्य मार्गों के किनारे संचालित की जा रही है। सबसे अधिक मीट की दुकानें पानी की टंकी के पास स्थित कसाई मंडी में मुख्य मार्ग के दोनों ओर खुले में संचालित हो रही हैं। इसके अलावा मवेशी बाजार, रेलवे स्टेशन के पास, नेहरू नगर, नदीपुल के किनारे चल रही हैं। कुछ दुकानें तो मंदिर-मस्जिद व अस्पतालों के पास भी संचालित हो रही हैं। शहजाद नदी के पुल के किनारे रामेश्वर धाम मंदिर स्थित है, जिससे चंद कदम की दूरी पर ही मुख्य मार्ग के किनारे करीब आधा दर्जन अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं। देवगढ़ रेलवे क्रॉसिंग के पास भी बने शिव मंदिर के पास अवैध तरीके से मछली काटकर बेची जा रही हैं। सदनशाह मस्जिद के बाहर खुलेआम बिना अनुमति के मीट की दुकानें खुली हुई हैं। यहीं हाल जिला अस्पताल के बाहर आसपास का है।
केवल एक मछली मार्केट
शहर में केवल एक ही स्थायी मछली मार्केट है, जो कई वर्षों पुराना है। इसके अलावा मीट, मुर्गा व मछली की दुकानें संचालित होने के शहर कहीं पर भी अलग से जगह की कोई सुविधा नहीं है। शहर में स्थानीय संगठनों द्वारा अनेकों बार मांग उठाई गई हैं, लेकिन इनके लिए अलग से कहीं भी जगह की व्यवस्था नहीं की गई है।
महावीर जयंती पर हो मांस-मंदिरा की दुकानें बंद
ललितपुर। दिगंबर जैन महासमिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर आगामी 09 अप्रैल को महावीर जयंती के अवसर पर शहर में संचालित अंडा, मांस-मीट व शराब की दुकानों को एक दिन के लिए बंद कराने की मांग की है। इस दौरान महेंद्र मड़वैया, जिनेंद्र जैन, बृजकिशोर, अजित कुमार आदि उपस्थित रहे।