पाली नगर पंचायत का भूराजस्व नक्शा 12 साल से गायब है। जिसकी बराबर तलाश की जा रही है। इस नक्शे के अभाव में यहां होने वाले भू विवादों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर शासन से पत्राचार हो रहा है, लेकिन अभी तक इसका कोई हल नहीं निकल सका है।
वर्ष 2004 से पाली कस्बे का भू-राजस्व नक्शा गायब है। हैरत करने वाली बात है कि भूराजस्व नक्शा लेखपाल, जिला अभिलेखागार, बोर्ड ऑफ रेवन्यू व रुड़की स्थित अभिलेखागार में मौजूद रहता है, जबकि पाली कस्बे का नक्शा इन सभी जगहों से गायब है। एक साथ सभी जगह से नक्शे का गायब होना किसी साजिश के तहत इशारा करता है। नक्शा गायब होने के कारण पाली कस्बे के भू विवादों का निस्तारण कोर्ट से नहीं हो पा रहा है। तर्क यह है कि भूराजस्व नक्शा न होने से कोर्ट में किसी भी पक्ष का जमीन पर कब्जा दिखाना आसान नहीं है। विकल्प के तौर पर अभी वर्तमान में सिंचाई विभाग के नक्शे का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन कानूनी फैसलों को विकल्प नक्शे के आधार पर वैधानिक नहीं ठहरा पा रहे हैं। इस कारण से पाली कस्बे के भूमि विवाद वर्षों से कोर्ट में लंबित हैं। इसके साथ ही नक्शा न होने का फायदा राजस्व कर्मियों द्वारा भी उठाया जा रहा है। मनमाने तरीके से लोगों को जमीनों पर कब्जे दिलाए जा रहे हैं व बेदखल किया जा रहा है।
पाली कस्बे के भू-राजस्व नक्शा के लिए बोर्ड ऑफ रेवन्यू से पत्राचार किया गया है। नक्शा न होने से विवादों के निपटारे में परेशानी होना स्वाभाविक है। जल्द ही रिमाइंडर भेजकर नक्शा बनवाने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
डॉ. रुपेश कुमार, जिलाधिकारी