ललितपुर। आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री सुप्रभसागर व नगर गौरव मुनिश्री प्रणत सागर महाराज का नगर में आगमन हुआ। कैलगुवां तिराहा पहुंचकर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उनकी अगुवानी की। मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि आधुनिक चकाचौंध में मानव आत्मिक सुध से दूर हो गया है।
मुनिश्री का बानपुर से ललितपुर के लिए पद विहार चल रहा था। ग्राम रजवारा में रात्रि विश्राम करने के बाद शुक्रवार की सुबह ललितपुर की ओर विहार हुआ। वीर व्यायाम शाला के स्वयं सेवक बैंडबाजों की मधुर ध्वनि करते हुए चल रहे थे। रास्ते में श्रद्धालुओं ने दरवाजों पर मुनिद्वय की आरती उतारी और पाद प्रक्षालन किया। श्रद्धालुओं ने दरवाजों पर रंगोली भी सजाई। सावरकर चौक पहुंचने पर आचार्यश्री धर्मभूषण महाराज और मुनिद्वय का मिलन हुआ। श्री अटा जैन मंदिर पहुंचने पर जैन पंचायत समिति द्वारा आरती और पाद प्रक्षालन किया गया।
मंदिर में हुई धर्मसभा में मुनिश्री सुप्रभसागर महाराज ने कहा कि भौतिकता की चकाचौंध में व्यक्ति का आत्मिक सुख कहीं खो सा गया है। पहले व्यक्ति के पास भले ही भौतिक सुख संसाधन कम थे, लेकिन सुख और शांति थी। आज ज्यों - ज्यों भौतिक सुख- सुविधाएं बढ़ रहीं हैं, त्यों- त्यों उसकी सुख- शांति कम होती जा रही है। तनाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है। आत्म की उन्नति से ही देश की उन्नति होती है। भौतिक सुख के पीछे लोग मानवता को भूल बैठे हैं। यह सुख क्षणभंगुर है। मानव शरीर इसलिए मिला है कि हम इस जीवन में अपने इष्ट को आत्मसात कर सकें। कोरोना वायरस पर उन्होंने कहा अपने जीवन में करुणा, अहिंसा, दया को स्थान दें और भारतीय संस्कृति के अनुसार जीवन जिएं तो वायरस प्रभाव नहीं करेगा।
मुनिश्री प्रणतसागर महाराज की जन्म भूमि ललितपुर है। उन्होंने धर्मसभा में कहा कि हर व्यक्ति सुखी होना चाहता है, लेकिन कार्य दुखी होने के करता है। जो गुरु के वचनों को अपनाकर अक्षरश: पालन कर लेगा, वह इंसान जीवन में सफल और सुखी होगा। ललितपुर धर्मप्राण नगरी है, यह संस्कार और वैराग्य के लिए उर्वरा भूमि है। यही वजह है कि यहां से मुझ जैसी अनेक आत्माओं ने जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की है।
धर्मसभा में आचार्यश्री धर्मभूषण महाराज ने कहा कि जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा दी। प्रवचन सभा के पूर्व जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने दीप जलाया। महिला मंडल ने शास्त्र भेंट किया। श्रमणोपासक संघ, वीर व्यायाम शाला के स्वयं सेवक, विद्वतवर्ग, मुनिश्री प्रणत सागर के गृहस्थ जीवन के परिवारजनों आदि ने आचार्यश्री व मुनिश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुनिश्री की अगवानी की
जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, श्री अटा जैन मंदिर के प्रबंधक कपूरचंद, भगवानदास, सुंदरलाल, ज्ञानचंद्र, मनोज जैन, अनिल, नरेंद्र कंड़की, डॉ. सुनील संचय, संजीव जैन, अमित चंदन, चंचल, अभिषेक, नरेश मुक्ता, अक्षय जैन अलया, संतोष अमृत, छोटे पहलवान, आशीष छोटू, गेंदालाल सतभैया, जिनेंद्र जैन, अनंत सराफ, अमित, शादीलाल एड., आनंद, निशिल जैन, वीरेंद्र विद्रोही, धन्य कुमार, सोमचंद्र जैन, डॉ. संजीव कंड़की, ऋषि जैन, मोनू जैन, वीणा जैन, नीलम सराफ, सुलोचना जैन, रत्नप्रभा जैन, ममता मोहनी आदि शामिल रहीं।
अगवानी में दिखा कोरोना का असर
मुनिश्री के आगमन पर कोरोना वायरस का असर दिखाई दिया। डॉ. सुनील संचय ने बताया कि नगर प्रवेश के समय मुनिद्वय को श्रद्धालु बिना पैर छुए दूर से ही नमस्ते कर रहे थे। जो पैर छूने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें साथ में चल रहे श्रद्धालुओं ने दूर से ही नमस्ते करने को कहा। जहां- जहां मुनिश्री के पाद प्रक्षालन हुए, वहां श्रद्धालुओं ने हाथ में कलश लेकर जल की धारा पैरों पर डालकर पाद प्रक्षालन किया, लेकिन हाथों से स्पर्श नहीं किया गया श्रद्धालुओं को मुनिश्री के दर्शन दूर से करने की अपील की गई।