झांसी। वायरल और मच्छर जनित बीमारियों ने शहर पर कहर बरपाया है, लेकिन लोगों को इनसे बचाने वाला मलेरिया विभाग खुद ही इलाज को मोहताज है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि शहर की छह लाख की आबादी को मच्छरों से छुटकारा दिलाने के लिए विभाग के पास सिर्फ आठ कर्मचारी हैं। ऐसे में शहर में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों - क्लिनिकों में मरीजों की भरमार है।
शहर में जगह-जगह गंदगी की भरमार है। सफाई न होने की वजह से तमाम नाले-नालियां जाम हैं। इससे मच्छर खूब पनप रहे हैं। यह लोगों को संक्रमित कर रहे हैं। इससे मलेरिया के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों व क्लिनिकों में वायरल बुखार के साथ-साथ मलेरिया के मरीजों की भी भरमार है। ऐसे में मलेरिया विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। लेकिन पर्याप्त साधन-संसाधन ही नहीं हैं। विभाग में मच्छर मारने की दवा के छिड़काव के लिए फील्ड वर्कर के 42 पद हैं। इनमें से आधे से ज्यादा खाली हैं। सिर्फ 14 वर्कर तैनात हैं, परंतु इनमें से भी छह अन्य कार्यालयों से अटैच हैं। शहर में दवा के छिड़काव के लिए महज आठ कर्मचारी ही बचे हैं। इसके अलावा सुपरवाइजर भी 14 में से सात ही हैं।
मलेरिया के 72 मरीज मिले
झांसी। मलेरिया बारिश के मौसम में फैलने वाला खतरनाक रोग है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार मलेरिया से दुनिया में रोजाना एक हजार लोगों की मौत होती है। इसका संक्रमण मादा मच्छर के काटने से होता है। संक्रमित मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उसमें मौजूद परजीवी रक्त में लार के रूप में संक्रमण छोड़कर व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं। मलेरिया विभाग अब तक शहर में 72 मरीजों को चिह्नित कर चुका है। इससे कई गुना अधिक मरीज प्राइवेट अस्पतालों व क्लिनिकों में पहुंच रहे हैं। मलेरिया संक्रमण के लिहाज से आने वाले दो महीने बेहद खतरनाक हैं।
मलेरिया के लक्षण
सामान्य तौर पर मलेरिया का संक्रमण होने के लगभग एक सप्ताह बाद इसके लक्षण नजर आते हैं। इसके लक्षण यह हैं -
- सिर व बदन दर्द
- जी मचलाना, उलटी आना
- कमजोरी, भूख न लगना
- खून की कमी, हाथ पैर में ऐंठन
-तेज बुखार और सर्दी लगना
ऐसे बचें
-घर के आसपास पानी को जमा नहीं होने दें। गंदगी भी हटा दें।
- कूलर और टंकियों की नियमित सफाई करें।
-घर से कबाड़ और पुराने बेकार पड़े टायर हटा दें
- पूरी आस्तीन की शर्ट पहनें।
- बुखार आने पर तत्काल खून की जांच कराएं।
मच्छरों से निपटने को रोस्टर तैयार
मच्छरों की रोकथाम के लिए टेमेफास और पाइरीथ्रम कीटनाशकों का नगर में छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए रोजाना चार वार्डों का रोस्टर तैयार किया है। कीटनाशकों की पर्याप्त उपलब्धता है। नगर निगम फागिंग कर रहा है। अस्पतालों में भी मलेरिया की दवाओं की समुचित व्यवस्था है। मलेरिया विभाग के जो फील्ड वर्कर अन्य विभागों में हैं, उनसे भी काम लिया जाएगा।
डा. विनोद कुमार यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी