ललितपुर। शहर का इकलौता पार्क कंपनी बाग दिन ढलते ही शराबियों और अराजक तत्वों का अड्डा बन जाता है। यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने के कारण शाम से ही महफिलें जमने लगती है, जिससे यहां टलहने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर में नगर पालिका के करीब एक दर्जन पार्क है, जो पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। वर्तमान में अब केवल चंद्रशेखर आजाद उद्यान पार्क (कंपनी बाग) ही है, जिसका उपयोग स्थानीय जनता करती है। इस पार्क को संवारने के लिए जनहित में नगर पालिका बीते चार वर्षों में करोड़ों रुपये व्ययकर चुकी है, लेकिन इस पार्क पर स्वामित्व जिला उद्यान विभाग का है। जिला उद्यान विभाग द्वारा इस पार्क के रखरखाव के लिए माली व सुरक्षा के चौकीदार नियुक्त हैं, लेकिन चौकीदार अपनी ड्यूटी पर तैनात नहीं रहते हैं। यही कारण है कि सुरक्षाकर्मी की गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए शाम को यहां पर अराजक तत्वों व नशेड़ियों की महफिलें जमने लगती हैं। शाम से देर रात तक यहां पर अराजक तत्वों द्वारा गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। मेहफिल खत्म होने के बाद सारी गंदगी को पार्क में ही फैंक दिया जाता है। सुबह चार बजे से यहां पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों व वृद्घों का घूमने के लिए आना शुरु हो जाता है। अब इतनी सुबह नगर पालिका के कर्मचारी आकर सफाई कर नहीं कर सकते हैं, जिस कारण पार्क में फैली इन शराब व बियर की बोतलों व अन्य सामग्रियों से सुबह-सुबह से लोगों का दिमाग खराब हो जाता है। नगर पालिका ने करोड़ों रुपये की लागत से पार्क की सुंदरता बनाने के लिए फुब्बारे, हट व बच्चों के मनोरंजन के साधन और यहां होने वाले लोगों की सुविधा के लिए पक्के फुटपाथ, प्रसाधन केंद्र व म्यूजिकल सिस्टम की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। लेकिन यहां सुरक्षा की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी नागरिकों को एक स्वच्छ माहौल व वातावरण नहीं मिल पा रहा है।
अतिक्रमण की आड़ करती है बचाव
पार्क की बाहरी दीवार से सटकर पूरे में अतिक्रमण है, इस अतिक्रमण के कारण आराजकत्तवों को आड़ मिल जाती है और वह लोगों की नजरों से बच जाते हैं। आराकतत्तवों द्वारा तो गतिविधियां अंजाम दी जा रही हैं वह इन्हीं अतिक्रमण की आड़ लेकर की जा रही है। बाहर अतिक्रमण किए हुए हाथ ठेलों व अस्थाई दुकानों में अधिकतर दुकानें मांसाहारी खाने, अंडा व नमकीन आदि की हैं। अतिक्रमण केे हटाने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है। वहीं पार्क में नगर पालिका द्वारा लगाई गई सोलर लाइटें भी बंद पड़ी हुई है, जिस कारण अंधेरे का भी पूरा फायदा उठाया जाता है।
स्वच्छ वातावरण है जरूरी
जनता सुबह पार्क में ठहलने के लिए इसलिए आती है कि उन्कों सुबह से सादगी भरी हवा मिले। लेकिन पार्क में फैली इन मादक पदार्थ की सामग्री से स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पा रहा है। जिला उद्यान विभाग, नगर पालिका व पुलिस विभाग इन अराजकतत्वों पर नकेल कसे और लोगों को पार्क में स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराऐं।
- भगवत सिंह लोधी
स्थानीय नागरिक।
जिला उद्यान विभाग करें सुरक्षा के इंतजाम
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल का कहना है कि नगर पालिका ने जनता की सुविधा व सहूलियत के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके पार्क को सुंदर व सुविधाओं से लैस बनाया है। जिला उद्यान विभाग की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने पार्क की सुरक्षा के लिए सुरक्षा कर्मी या चौकीदार को तैनात करें। सुबह के समय पार्क में शराब की बोतलें व अन्य सामग्री मिलती है, जिससे पार्क का माहौल खराब होता है और इसके लिए जनता नगर पालिका को कोसती है, जो ठीक नहीं है। दिन में सफाई कर्मचारियों द्वारा सफाई करा दी जाती है, लेकिन सुबह तक वापस वही स्थिति हो जाती है।
रोकने पर चौकीदार से करते हैं अभद्रता
इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा पार्क की सुरक्षा के लिए चौकीदार तैनात किया गया है। पार्क के आगे वाला हिस्सा खुला रहता है, बाकि अंदर का हिस्सा केवल सुबह-शाम खोला जाता है। पार्क में शराब पीने वाले लोगों को जब चौकीदार द्वारा रोका जाता है, तो वह चौकीदार से लड़ने को आमादा हो जाते हैं और गालीगलौज करके अभद्रता करते हैं। वैसे चौकीदार द्वारा पूरी कोशिश की जाती है कि अराजक तत्वों को रोका जाए, लेकिन कुछ लोग चोरी-छिपे ऐसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं तो इन्हें रोकने के लिए पुलिस का सहारा लिया जाएगा।