परिषदीय विद्यालयों में बंटने वाली ड्रेस अब कैमरों की निगरानी में वितरित होगी। माफिया को दूर करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब हर स्कूल में डीएम की ओर से एक सरकारी कर्मचारी को भेजा जाएगा और वह पूरे यूनीफार्म वितरण की वीडियोग्राफी करेगा।
डीएम मानवेंद्र सिंह ने माफिया पर सख्ती बरतते हुए ड्रेस वितरण की पूरी मॉनीटरिंग करने का निर्णय लिया है। डीएम ने बताया कि इसके लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिख दिया गया है। इस पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि पूरे जनपद के सभी विद्यालयों में एक ही दिन ड्रेस का वितरण किया जाए। इस वितरण प्रक्रिया में स्कूल की प्रबंध समिति के अलावा एक डीएम द्वारा चिह्नित सरकारी कर्मचारी भी मौजूद रहेगा, जो ड्रेस वितरण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करेगा। डीएम ने बताया कि शासनादेश के अनुसार ही ड्रेस को बनवाया जाएगा और वितरण किया जाएगा। गौरतलब हो कि जिले के 16 हजार तीन सौ बच्चों के लिए शासन ने प्रशासन को 18 लाख रुपये का बजट दिया है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से सभी प्रबंध समितियों के खाते में इस राशि को पहुंचा दिया है। बजट की जानकारी होते ही जिले के माफिया सक्रिय हो गए थे और पिछले सालों की तरह ही प्रक्रिया में धांधली का मंसूबा पाल रहे थे। डीएम के निर्देश के बाद माफिया के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इससे पहले भी शासन ने ड्रेस वितरण को पारदर्शी और गुणवत्तापरक बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। शासनादेश के अनुसार ड्रेस वितरण के लिए विद्यालय स्तर पर क्रय समितियां गठित की जाएंगी और खरीद के लिए कुटेशन और टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके अलावा भुगतान भी नकद न होकर कैशलेस होगा। इसके लिए विक्रेता को एकाउंटपेयी चेक के माध्यम से पेमेंट किया जाएगा।
बीएसए को एक ही तारीख में पूरे जिले में ड्रेस वितरण करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा हर विद्यालय में एक सरकारी कर्मचारी पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करेगा। यदि कुछ बच्चे उस दिन छूट जाएंगे तो उनके लिए बाद में फिर एक तारीख निर्धारित कर ड्रेस बंटवाई जाएगी।
मानवेंद्र सिंह, डीएम