कैप्सन - 11- राजकुमारी जैन, कड़ेसराकलां
- फोटो : TALDEHATE
तालबेहट/बिजरौठा। आज महिलाएं हर मोर्चें पर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। पर, कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से समाज में फैली कुरीतियों की परवाह किए बिना अपने परिवार का पालन पोषण किया और पूरी गृहस्थी को संवारकर नया मुकाम हासिल किया है। ऐसी महिलाएं समाज के लोगों के लिए उदाहरण हैं।
ग्राम बिजरौठा के मजरा बौलारी निवासी राजवती कुशवाहा के पति श्यामलाल लगभग चौहद वर्ष पहले घर से कहीं चले गए थे। तब से वह आज तक वापस नहीं आए। पति को मृत मानकर राजवती को शासन से विधवा पेंशन मिलने लगी। राजवती के ऊपर अपने चार पुत्र और एक पुत्री के परवरिश की जिम्मेदारी है। उसने एक हेक्टेयर भूमि पर खेती करते हुए अपने चार पुत्रों और एक पुत्री का पालन पोषण किया। आज वह अपने मकान में बच्चों के साथ अपना जीवन गुजार रही हैं।
राजवती की तरह कठिन जीवन ग्राम बौलारी निवासी 58 वर्षीय चंदन राजा बुंदेला का रहा है। उसके पति कोमल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। पति की मृत्यु के बाद एक पुत्र और दो पुत्रियों के लालन पालन की जिम्मेदारी उठाई। किसी तरह अपने बच्चों का पालन पोषण किया। एक पुत्री की शादी के बाद मौत हो गई। इसके बाद उसके जीवन का सहारा उसका इकलौता पुत्र भी ईश्वर को प्यारा हो गया। लेकिन, हौसला नहीं छोड़ा और इस समय वह मेहनत मजदूरी करके अपना भरण पोषण कर रही हैं।
ग्राम कड़ेसराकलां निवासी राजकुमारी जैन के पति सुनील कुमार की मृत्यु लगभग बीस वर्ष पहले हो गई थी। उनकी मौत के बाद दो पुत्र और एक पुत्री के पालन पोषण का जिम्मा राजकुमारी पर आ गया था। सामाजिक बंधनों को नकारते हुए राजकुमारी ने पति की छोटी से दुकान का संचालित करने का निश्चय किया। दुुकान से उन्होंने परिवार की गाड़ी को चलाया। बच्चों को पढ़ाने और शादी करने का जिम्मा भी निभाते हुए परिवार का पालन पोषण किया। उनकी मेहनत का परिणाम है कि गांव में कभी उनकी छोटी सी दुकान थी, आज बड़ी दुकान का रूप ले लिया है।
कैप्सन - 9 - राजवती कुशवाहा- फोटो : TALDEHATE
कैप्सन - 10 - चंदनराजा बुंदेला, बौलारी- फोटो : TALDEHATE