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एलयूसीसी : मुख्य संचालक, उसके भाई सहित चार गिरफ्तार

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कोतवाली तालबेहट में दर्ज हुए धोखाधड़ी के मामले में हुई गिरफ्तारी, आमलोगों की करोड़ों की जमापूंजी हड़पने का आरोप
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कैश कलेक्शन करने वाला और ब्रांच हेड को भी पुलिस ने दबोचा
जनपद के विभिन्न थानों में चिटफंड कंपनी के खिलाफ दर्ज हैं 18 से अधिक मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/तालबेहट। आमलोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में चिटफंड कंपनी एलयूसीसी के मुख्य संचालक रविशंकर तिवारी और उसके भाई विनोद तिवारी के साथ भरत वर्मा व मुकेश कुमार जैन को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से एक लग्जरी कार भी बरामद की गई है।
रुपये हड़पने के मामले में कंपनी के खिलाफ जनपद के विभिन्न थाना-कोतवाली में 18 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में एसआईटी ने मुख्य संचालक रविशंकर उर्फ रवि तिवारी सहित 40 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और संपत्ति जब्तीकरण की कार्रवाई भी की गई थी। करीब 14 माह जेल में बंद रहने के बाद कुछ माह पहले रविशंकर और विनोद जमानत पर जेल से रिहा हुए थे। इसके साथ अन्य आरोपी भी जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं।
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कोर्ट के आदेश पर छह जनवरी को कोतवाली तालबेहट में शक्ति वाल्मीकि निवासी मोहल्ला चौबयाना तालबेहट की तहरीर पर दीपक सहित 8-10 अज्ञात पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। आरोपी दीपक की अभी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। वहीं, मामले की जांच के दौरान रविशंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी, उसके भाई विनोद तिवारी पुत्र तिलकराम तिवारी निवासी लेखपाल कालोनी रामनगर थाना कोतवाली ललितपुर हाल निवासी 20 गीतग्रीन कालोनी करौंद थाना निशांतपुरा जिला भोपाल (मप्र), भरत वर्मा पुत्र जगदीश वर्मा निवासी सिविल लाइन चांदमारी थाना कोतवाली और मुकेश कुमार जैन पुत्र भागचंद निवासी ग्राम मड़ावरा के नाम प्रकाश में आए। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तालबेहट पुलिस व स्वॉट, सर्विलांस टीम जुटी हुई थी। सोमवार को पुलिस की टीमों ने रवि तिवारी व विनोद तिवारी को भोपाल से और मंगलवार की सुबह मुकेश जैन को मड़ावरा व भरत वर्मा को ललितपुर से गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। गिरफ्तार करने वाली टीम में तालबेहट कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनोज मिश्रा, स्वॉट टीम प्रभारी अतुल तिवारी, सर्विलांस प्रभारी अरुण पवार अपनी-अपनी टीम के साथ शामिल रहे।
पूछताछ में रवि व विनोद तिवारी ने बताया कि 2016 में समीर अग्रवाल ने एलयूसीसी नाम से चिटफंड कंपनी बनाई थी। अलग-अलग राज्यों के लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड का दुरुपयोग कर उन्हें कंपनी में महत्वपूर्ण पद दे दिए गए थे लेकिन पूरी कंपनी का संचालन समीर अग्रवाल व उसके मुंबई, इंदौर, लखनऊ व अन्य राज्यों के लोगों द्वारा किया जाता था।
वहीं, भरत वर्मा एलयूसीसी के विभिन्न शाखाओं से कैश कलेक्शन का काम करता था और झांसी स्थित चेस्ट में पहुंचाता था। मुकेश मड़ावरा में एलयूसीसी ब्रांच ऑफिस का हेड था। आरोपी कंपनी का नाम और अपने कार्यालय लगातार बदलते रहते थे। जब भी कोई शिकायत करता था तो उसके रुपये देकर वे लोग मामले को शांत करा देते थे।


होटलों में सेमिनार कर दिखाते थे बड़े सपने, विदेश में ले जाकर घुमाते थे
आरोपियों ने बताया कि वे लोग बड़े होटलों में सेमिनार आयोजित करते थे। वहां लोगों को लालच देकर विदेश में ले जाकर घुमाते भी थे ताकि लोगों को कंपनी पर भरोसा हो। एजेंटों को ज्यादा से ज्यादा लोगों को कंपनी से जोड़ने पर रातोंरात अमीर बनने का सपना दिखाया जाता था। कंपनी से जुड़ने वाले लोगों को महंगे कपड़े और होटलों में खाना मुफ्त में खिलाया जाता था। वहीं, आरोपी रकम को पांच वर्ष में दोगुना करने और रकम को गोल्ड माइंस में लगाने का लालच देते थे। ललितपुर, टीकमगढ़, सागर, अशोक नगर, झांसी और विदिशा में कंपनी का नेटवर्क था।


दुबई में छिपा बैठा है कंपनी का सीएमडी, 50 हजार का इनाम घोषित
चिटफंड कंपनी एलयूसीसी का सीएमडी समीर अग्रवाल है, जो वर्तमान में दुबई में बैठा बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए डीआईजी ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।
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वर्जन
आमलोगों की जमापूंजी हड़पने के मामले में चार आरोपियों को पुलिस की टीम ने गिरफ्तार किया है। मामले की जांच गहनता से की जा रही है। - मोहम्मद मुश्ताक, एसपी
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