अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। श्री रामकथा महामहोत्सव में संत विजय कौशल महाराज ने महर्षि वाल्मीकि एवं प्रभु श्री राम के संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि जब प्रभु ने महर्षि से रहने योग्य स्थान बताने का अनुरोध किया तो महर्षि वाल्मीकि ने कहा, प्रभु आप तो कण-कण में विराजमान हैं फिर भी नर लीला में जब आप पूछ ही रहे हो तो महर्षि ने प्रभु के रहने के 14 स्थान बताए हैं, जो हमारे शरीर में ही विद्यमान हैं। संसारियों को इस प्रसंग से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम ने हमारे कल्याण के लिए आदर्श जीवन स्वयं जी कर बताया है। केवट को भक्ति का वर दिया, माता सीता जी ने गंगा मैया का पूजन किया, आगे यात्रा में प्रभु प्रयागराज में त्रिवेणी स्नान कर ऋषि भारद्वाज जी के आश्रम पहुंचते हैं। रात्रि विश्राम कर भारद्वाज जी से आगे का मार्ग पूछते हैं। प्रभु बताते हैं कि मार्ग हमेशा परमार्थी से ही पूछना चाहिए तब आगे वे महर्षि वाल्मीकि जी के आश्रम पहुंचते हैं, जहां निवास स्थान पूछने पर प्रभु एवं महर्षि में सुंदर ज्ञानदायी संवाद होता है। महर्षि उन्हें चित्रकूट में निवास की बात कहते हैं। प्रभु जानकी एवं लक्ष्मण भैया चित्रकूट निवास करते हैं। यहां कोल भील प्रभु की सेवा में कंद मूल फल लाते हैं। इधर, श्रंगबेरपुर में सुमंत अयोध्या जाना नहीं चाहते हैं तब निषादराज गुह्य उन्हें समझा बुझाकर अयोध्या वापस भेजते हैं। सुमंत मन भारी कर अयोध्या पहुंचते हैं। सूनारथ देखकर मां कौशल्या विफल हो गई। जैसे ही सुमंत महाराजा दशरथ के पास पहुंचकर बताते हैं कि मेरे साथ कोई नहीं आया, यह सुनकर महाराजा दशरथ व्यथित हो जाते हैं। स्वयं को दोषी मानते हुए कहने लगा कि मेरे जैसा पुत्र किसी का नहीं हो सकता जो आज्ञा पालन में अपने वन जाने का अपराध क्या है यह भी नहीं पूछता राजा दशरथ मूर्छा में जाते हैं। होश आने पर श्रवण कुमार के अंधे माता पिता की याद आती है। मरते समय पुत्र वियोग में दिए गए श्राप का ध्यान करते हैं। अपने जीवन में पूर्व में किए गए कृत्य अंत समय याद आते हैं। महाराजा दशरथ प्रभु राम, जानकी, लक्ष्मण को याद करके विलाप करते हैं। राम राम छः बार राम स्मरण कर प्राण त्याग देते हैं। मानसकार कहते हैं कि महाराजा दशरथ का जीवन धन्य है जिन्होंने जीवन में राम से पुत्र का दर्शन किया और मरे तो राम राम का स्मरण करते रहे।
मंगलवार को कथा सुबह 10 बजे से प्रारंभ होगी। कथा के पूर्व मुख्य यजमान सरदार वीके सिंह, रुपिंद्रर कौर, इंद्रजीत सिंह बलजीत सिंह अनुजकांत दीक्षित, धर्मेंद्र रावत, कौस्तुभ चौबे राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, राजीव बबेले,उर्मिला दीक्षित,अन्नपूर्णा शास्त्री ने आरती उतारी ।
राधा रानी कृपा बरसाए रखना..... चित्र महाराज ने बांधा समां
ललितपुर। श्री रामकथा महामहोत्सव में रविवार रात भजन संध्या का आयोजन हुआ। वृंदावन से आए चित्र महाराज ने श्री राधारानी एवं प्रिया प्रियतम के चरणों में अपनी स्वर साधना समर्पित की। इस मौके पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करते रहे।
संत प्रवर विजय कौशल महाराज एवं महंत रामलखन दास महाराज के सानिध्य में आयोजित भजन संध्या के शुभारंभ पर मुख्य यजमान सरदार वीके सिंह,यजमान पं.कौस्तुभ चौबे ने पूजन एवं दीप प्रज्जवलन की क्रियाएं संपन्न कराई। चित्र महाराज ने करुणामयी कृपामयी मेरी दयामयी राधे हरी नाम गा लो सहारा मिलेेगा, राधा नाम गा लो सहारा मिलेगा, बांके बिहारी श्री वृंद्रावन में हाय मेरा दिल खो गया, हमे राधा रानी तेरे नाम का सहारा आदि भजन गाए तो समूचा पांडाल भावविभोर हो गया। उन्होंने अपना चिर-परिचित भजन मेरी विनती यही है राधा रानी कृपा बरसाए रखना, राधा मानो हजारों हाथ विनती के लिए उठे भक्तगण भावविभोर हो उठे। इस मौके पर सुभाष जायसवाल, विष्णु अग्रवाल, धर्मेंद्र जडिया, अजय नायक, दुष्यंत बडौनिया, नरेश शेखावत, जितेंद्र राठौर,निखिल तिवारी, दीपक राठौर आदि मौजूद रहे। ब्यूरो