ललितपुर। अमर उजाला गणतंत्र का जश्न कार्यक्रम के अंतर्गत मोहल्ला आजादपुरा स्थित सेंट्रल पब्लिक स्कूल में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। नन्हें-मुन्नें बच्चे विभिन्न पोशाकों में नजर आए। कोई भारत मां की पोशाक में हाथ उठाकर आशीर्वाद प्रदान कर रहा था तो कोई महारानी लक्ष्मीबाई की तरह तलवार व भगत सिंह की तरह कटार लहरा रहा था। किसी ने नेताजी सुभाष के स्वरूप की पोशाक पहनी।
गणतंत्र दिवस को लेकर बच्चों में खासा उत्साह है। विभिन्न विद्यालयों में देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई है। अमर उजाला ने देश भक्ति का जोश भरने के लिए सेंट्रल पब्लिक स्कूल में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन कराया। इसमें नन्हें- मुन्नें बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी जताई। नर्सरी की छात्रा आशी भारत माता, एलकेजी की छात्रा परिणिति महारानी लक्ष्मीबाई, एलकेजी की छात्रा सुविज्ञा राधा, यूकेजी के छात्र कल्प फौजी, यूकेजी की किंजल परी, यूकेजी के आरव सोनी फैशन, कक्षा द्वितीय की छात्रा अवंतिका क्वीन, कक्षा तृतीय की आर्य पंजाबी गर्ल, कक्षा तृतीय की रितिका पंजाबी गर्ल, कक्षा चार के कार्तिक शर्मा सुभाषचंद्र बोस, कक्षा पांच के युगांक भगत सिंह, कक्षा छह की वंशिकां वर्मा महारानी लक्ष्मीबाई, कक्षा सात के रितुराज भगत सिंह, कक्षा आठ के अभय तिवारी जवाहरलाल नेहरू के स्वरूप में नजर आए। विद्यालय स्टाफ ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बच्चे रैंप पर कतारबद्ध चले, जो जिस महापुरुष की ड्रेस में था, वह उसी की नकल कर रहा था। कार्यक्रम में डायरेक्टर डीएस विवेक, शालिनी, स्वेता पुरोहित, ऊषा राजपूत, हेमलता, पलक जैन, प्रियंका श्रीवास्तव, वैशाली आदि उपस्थित रहे।
सुभाष चंद्र बोस की तरह बनना काफी अच्छा लगा। देश उनके योगदान को भुला नहीं सकता है। आज उनकी जयंती पर सभी लोग उन्हें याद कर रहे हैं।
- कार्तिक शर्मा, कक्षा चार
महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। आज झांसी की पहचान महारानी लक्ष्मीबाई के कारण है। हमें उनके शौर्य पर गर्व है।
- तश्मियां, कक्षा पांच
शहीद भगत सिंह की बात आती है तो लोगों में खुद व खुद जोश भर जाता है। उनके उग्र तेवरों को देख अंग्रेज भी कांप जाते थे। उनके शौर्य के किस्से सुनना अच्छा लगता है।
- ऋतुराज बुंदेला, कक्षा सात
जवाहर लाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंनी बने थे। उन्होंने देश के विकास की आधारशिला रखी थी। बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के नाम से पुकारते थे। उनके जन्म दिवस पर बालदिवस मनाया जाता है।
- अभय तिवारी, कक्षा आठ
महाराणा प्रताप कभी झुके नहीं थे। उन्होंने घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन वह मुगलों के समक्ष समर्पण के लिए तैयार नहीं हुए।
- आयुष गुप्ता, कक्षा चार
भारत मां बनना गौरव की बात है। जिस मिट्टी में हमने जन्म लिया है, वह हमारी मां है और उसकी रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
- सिद्घिक्षा, कक्षा पांच
पंजाबी कुडी की पोशाक पहनने का अवसर मिला है। पंजाब की संस्कृति सभी को लुभाती है। चाहे वहां की मक्के की रोटी, सरसों का साग हो या वहां का डांस।
- आर्य गिरि, कक्षा तृतीय