ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए लाखों की लागत से लिफ्ट लगाई गई थी। लेकिन ये लगभग आठ साला से खराब पड़ी है। भूतल से मरीजों को वार्डों तक जाने के लिए तीमारदार खुद रैंप से स्ट्रेचर खींचकर ले जाते हैं। मरीज के साथ सिर्फ एक तीमारदार होने से काफी परेशानी आती है।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (जिला अस्पताल) का भवन तीन मंजिला है। इसमें प्रथम और द्वितीय तल पर दो-दो वार्ड में 35-35 बेड हैं। भूतल से प्रथम और द्वितीय तल के वार्डों में मरीजों को पहुंचाने के लिए 10 साल पहले लाखों की लागत से लिफ्ट लगवाई गई थी। शुरुआत में तो लिफ्ट चालू होने से मरीजों को लाभ मिला। लेकिन, अब आठ वर्ष से लिफ्ट खराब पड़ी है। ऐसे में मरीजों को वार्डों तक तीमारदारों को लेकर जाना मुश्किल हो रहा है। रैंप से मरीजों को स्ट्रेचर से खींचना मुश्किल हो रहा है। कई मरीजों के साथ एक तीमारदार या महिला तीमारदार होने पर स्ट्रेचर से लेकर जाने में दिक्कत होती है। ऐसे में दूसरे लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार इकलौते तीमारदार को घंटों तक सहारे के लिए इंतजार करना पड़ता है।
ये है स्थिति
- बेड - 140
- वार्ड - 04
- लिफ्ट - 01
- रैंप - 01
- सीढि़यां - 01
ये बोले लोग
अस्पताल में लिफ्ट बंद रहने स्ट्रेचर पर मरीज को रैंप से ले जाने में दिक्कत होती है। बुजुर्ग या महिला तीमारदार होने पर दिक्कत होती है। - मिथला
मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने पर लिफ्ट चालू होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक शुरू नहीं हुई है। इससे काफी परेशानी होती है। - राहुल
मेडिकल काॅलेज (जिला अस्पताल) के भवन की मरम्मत कराई जा रही है। लिफ्ट को भी ठीक कराया जा रहा है। जल्द ही ठीक कराई जा रही है। - डॉ. डीनाथ, प्राचार्य, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय।