ललितपुर। शहजाद और सजनाम बांध की नहरों को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।सीपेज, लीकेज से होने वाली पानी की बर्बादी रोकी जाएगी। जो पानी बचेगा उससे सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा।
तहसील तालबेहट क्षेत्र में शहजाद नदी पर निर्मित बांध में संरक्षित पानी से लोगों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। साथ में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। बांध से 116.60 किलोमीटर दाईं व बाईं नहर निकली है। इसी प्रकार तहसील महरौनी क्षेत्र में 40 वर्ष पूर्व बने सजनाम बांध से 39.950 किमी लंबी दो मुख्य नहरें हैं। दाईं 19.650 किलोमीटर और बाईं नहर 20.300 किलोमीटर लंबी है।
काफी पुराने होने के कारण ये नहरें जर्जर अवस्था में पहुंच गई हैं। इनमें पानी छोड़े जाने के दौरान लीकेज और सीपेज से काफी पानी बर्बाद होता है। पानी नहर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंचता। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए सिंचाई विभाग ने शहजाद बांध की दाईं और सजनाम बांध की बाईं नहर को आदर्श नहर योजना में शामिल किया। कार्ययोजना को स्वीकृति मिलने के बाद शहजाद बांध की दाईं नहर का करीब दो करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कर इसकी लाइनिंग कर इसे मॉडल नहर बनाया गया। वहीं, सजनाम बांध की बाईं नहर पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से काम किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह काम अंतिम चरण में है।
अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड शैलेष कुमार ने बताया कि शहजाद बांध से संचालित होने वाली दाईं नहर का आदर्श नहर योजना के तहत जीर्णोद्धार कराया गया है। पानी बचने से सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा।