मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आने वाले मरीज दलालों के निशाने पर हैं। अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल मरीजों और तीमारदारों को गुमराह कर निजी क्लीनिकों तक पहुंचा रहे हैं, जहां मुफ्त इलाज का भरोसा देकर उनसे महंगी दवाइयों के नाम पर रकम वसूली जा रही है। शनिवार को ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमें एक मरीज को सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के नाम पर निजी क्लीनिक ले जाकर 1200 रुपये की दवाइयां थमा दी गईं।
ग्राम गंगचारी निवासी श्रीपत (32) पुत्र बाबू पैरों के दर्द से परेशान था। शनिवार को वह पत्नी और बेटे के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचा। पर्चा बनवाने के बाद वह आर्थो सर्जन की ओपीडी की ओर जा रहा था। इसी दौरान दो महिलाओं ने उसे रोककर बीमारी के बारे में पूछा। श्रीपत ने बताया कि वह हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने जा रहा है। इस पर महिलाओं ने कहा कि आठ नंबर कक्ष बंद है, डॉक्टर बाहर बैठे हैं, वहीं दिखा लो।
श्रीपत के कहने पर महिलाओं ने तत्काल एक युवक को बुलाया, जो उसे मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक निजी क्लीनिक पर ले गया। वहां मौजूद व्यक्ति ने बीमारी पूछने के बाद क्लीनिक से ही 1200 रुपये की दवाइयां दे दीं। इसी दौरान वहां दूसरी महिलाओं द्वारा अन्य मरीजों को भी लाया जाता देख श्रीपत को शक हुआ। वह तुरंत मेडिकल कॉलेज के कक्ष संख्या आठ में पहुंचा, जहां डॉक्टर मौजूद मिले। मामला सामने आने पर अस्पताल प्रशासन सतर्क हो गया और पुलिस को सूचना दी गई।
मुफ्त इलाज का झांसा, फिर दवाओं के नाम पर वसूली
मेडिकल कॉलेज में सक्रिय दलाल बेहद शातिर तरीके से मरीजों को अपने जाल में फंसाते हैं। पहले मरीजों को भरोसा दिलाया जाता है कि डॉक्टर फीस नहीं लेंगे और इलाज निशुल्क होगा। सरकारी अस्पताल का नाम सामने आने पर मरीज आसानी से झांसे में आ जाते हैं। बाद में निजी क्लीनिकों पर उन्हें महंगी दवाइयां थमाकर रकम वसूल ली जाती है।
कार्रवाई की भनक लगते ही वापस लीं दवाइयां
मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन और पुलिस तक पहुंचते ही दलाल सक्रिय हो गए। जब मरीज दवाइयां लौटाने क्लीनिक पहुंचा तो तुरंत दवाइयां वापस ले ली गईं। साथ ही मामले में कोई शिकायत या कार्रवाई न करने की सलाह भी दी गई।
अस्पताल परिसर में खुलेआम मंडराते हैं दलाल
मरीजों और तीमारदारों के अनुसार मेडिकल कॉलेज परिसर में महिला अस्पताल से लेकर पुरुष अस्पताल तक कई संदिग्ध लोग सक्रिय रहते हैं। छुट्टी के दिनों में इमरजेंसी के आसपास इनकी गतिविधियां और बढ़ जाती हैं। मरीजों को निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में बेहतर इलाज का लालच देकर ले जाया जाता है। सवाल यह है कि सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद इन पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
केस-1 : पांच हजार में रक्त दिलाने का वीडियो वायरल
19 फरवरी 2024 को मेडिकल कॉलेज में ओ पॉजिटिव रक्त दिलाने के नाम पर पांच हजार रुपये लेने का वीडियो वायरल हुआ था। मामले में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लेकर जांच के निर्देश दिए थे।
केस-2 : गर्भवती महिला की मौत के बाद उठे थे सवाल
एक मार्च 2025 को मोहल्ला आजादपुरा निवासी गर्भवती महिला मालती सोनी की मौत के बाद इलाज में लापरवाही और बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई बाहरी महिलाओं के नाम भी चर्चा में आए थे।
मामले की जानकारी हुई है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा जा रहा है। आम लोगों से अपील है कि परिसर में किसी के झांसे में न आएं और सीधे चिकित्सकों से परामर्श लेकर ही उपचार कराएं। -
डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
जानकारी देता पीड़ित....