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Lalitpur Ground Report: गोबर्धन योजना से मेडिकल सुविधाओं तक, महिलाओं को मिला रोजगार; ललितपुर में कितना विकास?

Tue, 18 Aug 2026 06:34 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर

सार

Lalitpur Ground Report: अमर उजाला की टीम ने 'सक्षम यूपी' कार्यक्रम के तहत ललितपुर जिले का दौरा किया। जिले का दौरा कर सरकारी योजनाओं और विकास दावों की जमीनी हकीकत को परखा। यूपी सरकार के किए गए काम से लोगों को कितना फायदा हुआ है, यहां देखिएं इस रिपोर्ट में।
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Lalitpur Ground Report - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब एक साल से भी कम समय बचा है। राज्य के राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में, अमर उजाला की टीम ने 'सक्षम यूपी' कार्यक्रम के तहत ललितपुर जिले का दौरा किया है। इस पड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े असर को समझना था। टीम ने जिले में सरकार के विकास के दावों की असल तस्वीर जानने का प्रयास किया। यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी हकीकत टटोलने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पड़ताल के माध्यम से सरकारी नीतियों के स्थानीय लोगों पर पड़े प्रभाव को समझा गया। टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। इसका लक्ष्य यह जानना था कि सरकार द्वारा किए गए विकास के वादे कितने पूरे हुए हैं।

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ललितपुर में बायोगैस प्लांट, 250 रुपये में मिलती है हर महीने रसोईगैस
बायोगैस के जिला सलाहकार इंद्रेश कुमार ने बताया कि मैं यहां डिस्ट्रिक्ट कंसलटेंट हूं। जो मैं इस योजना को यहां पर देखता हूं। यह भारत सरकार के द्वारा 2023 में स्थापित की गई थी। इसकी लागत 39.90 लाख थी। इस योजना के तहत यह हमारे पास में गौशाला भी है। वहां से गोबर आता है। इसके बाद इसकी प्रक्रिया पूरी होती है, जो गैस यहां पर बनाई जाती है। 12 परिवारों को गैस पाइप लाइन के जरिए देते हैं। वहीं आटा चक्की भी है। ग्राम पंचायत के लोगों को एक रुपये प्रति केजी के हिसाब से सबसे कम दर में पिसाई की जाती है। जो ग्राम पंचायत के लोगों को दी जाती है। 

जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि राज्य सरकार का फोकस है। मुख्यमंत्री का भी फोक से है। जितनी भी गौशालाएं हैं उनकी देखरेख ठीक से किया जाए। साथ ही साथ उनको स्वालंबन बनाया जाए। इसी के तहत एक योजना आई थी गोबर्धन योजना। उस योजना में 39 लाख की लागत से एक गोबर गैस प्लांट बनाया है। जिसकी कैपेसिटी है वो 85 क्यूबिक स्क्वायर मीटर का है। जो इतना गैस जनरेट करता है और डेली जो गौशाला से गोबर निकलता है उसमें लगभग 2300 किग्राम गोबर पर हर दिन लगता है। तो इससे जो गैस जनरेट होता है। उससे गांव के कुछ लोगों को पाइप लाइन बिछाकर डेली रेगुलर कुकिंग गैस के रूप में सप्लाई किया जा रहा है। जिसका किराया मात्र 250 रुपये महीना है। वहीं गौशाला में इससे बिजली उत्पन की जाती है।
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यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत

मेडिकल सेवा से कितना हुआ सुविधाओं में सुधार, कितना मिला रोजगार
प्रधानाचार्य डॉ. मयंक कुमार शुक्ल ने बताया कि 2023 में पहला बैच हमारे यहां आया। जब से मेडिकल कॉलेज आया है, यह अपग्रेडेड मेडिकल कॉलेज में है, जो जिला अस्पताल को अपग्रेड करके बनाया जाता है। फेज थ्री का मेडिकल कॉलेज है। इसके आने के बाद से जो भी रेफरल सिस्टम होता था, जो भी आसपास के बड़े शहरों में जाना होता था। झांसी, ग्वालियर, भोपाल वो काफी कम हुआ है। काफी तरह का इलाज चालू है। बच्चों के बैच आ गए हैं। 200 बच्चे इस समय यहां पर पढ़ रहे हैं। इनके आ जाने से यहां पर जो है रोजगार भी बढ़ता है। दूसरा हमारे को मेडिकल कॉलेज आ जाने के बाद से क्या-क्या चीजें होती हैं? तो मेडिकल कॉलेज आने के बाद से हमारे पास बहुत से डॉक्टर्स जुड़े हैं। हर विधा में चाहे वो मेडिसिन हो, सर्जरी हो, जो सर्जरीज यहां पर अभी तक नहीं होती थी। वो सारी शुरू हो गई है। जैसे कि हम कैंसर सर्जरीज करने लगे हैं। हमने थायराइड की सर्जरी शुरू कर दी है। हमने कूल्हा प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है। घुटना प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है। लिगामेंट इंजरीज शुरू कर इंजरी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है। इसके अलावा डेंटल ट्रीटमेंट यहां शुरू हो गया है जो कि ऑलमोस्ट जीरो था। 

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लखपति दीदी योजना के तहत शुरू हुआ किचन, आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
लखपति दीदी योजना के तहत यहां एक किचेन तैयार किया गया। एक अह प्लेटफॉर्म है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई। लखपति दीदी राजेश राजा बुंदेला ने बताया कि ललितपुर से नहीं हैं बल्कि छिपाई गांव से हैं। आता यहीं है। तीन साल से काम कर रही हैं। आगे बताया कि खुशी होती है। खाना बनाने में और खाना परोसने में बहुत अच्छा लगता है हमारे लिए मतलब कि जो हमारी जिंदगी इस तरीके से सुधरी है। पहले जो जिंदगी घर में कटती थी वो सही नहीं थी। हमारी सरकार ने इतना मौका दिया। हमारे लिए कि जो हमारी जिंदगी अच्छे खासे कट रही हो, बच्चों का भरण पोषण अच्छे से हो रहा है। पढ़ाई लिखाई अच्छे से हो रही है। हर चीज में हम आगे बढ़ रहे हैं। पहले घर में सब लोग परेशान भी करते थे। अब खर्चे में हर चीज में हर चीज से भरपूर हैं। पहले ऐसा था कि एक तरफ से पैसे आते थे तो उतना ही खर्चा होता था। जितना मतलब भरपूर भी नहीं हो पाता था। लेकिन अब ऐसा है कि दोनों तरफ से कमाते तो मौज होती है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा अच्छी तरह से उठता है। अब पहले के मुकाबले सोचना नहीं पड़ता है। 

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