मेडिकल सेवा से कितना हुआ सुविधाओं में सुधार, कितना मिला रोजगार
प्रधानाचार्य डॉ. मयंक कुमार शुक्ल ने बताया कि 2023 में पहला बैच हमारे यहां आया। जब से मेडिकल कॉलेज आया है, यह अपग्रेडेड मेडिकल कॉलेज में है, जो जिला अस्पताल को अपग्रेड करके बनाया जाता है। फेज थ्री का मेडिकल कॉलेज है। इसके आने के बाद से जो भी रेफरल सिस्टम होता था, जो भी आसपास के बड़े शहरों में जाना होता था। झांसी, ग्वालियर, भोपाल वो काफी कम हुआ है। काफी तरह का इलाज चालू है। बच्चों के बैच आ गए हैं। 200 बच्चे इस समय यहां पर पढ़ रहे हैं। इनके आ जाने से यहां पर जो है रोजगार भी बढ़ता है। दूसरा हमारे को मेडिकल कॉलेज आ जाने के बाद से क्या-क्या चीजें होती हैं? तो मेडिकल कॉलेज आने के बाद से हमारे पास बहुत से डॉक्टर्स जुड़े हैं। हर विधा में चाहे वो मेडिसिन हो, सर्जरी हो, जो सर्जरीज यहां पर अभी तक नहीं होती थी। वो सारी शुरू हो गई है। जैसे कि हम कैंसर सर्जरीज करने लगे हैं। हमने थायराइड की सर्जरी शुरू कर दी है। हमने कूल्हा प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है। घुटना प्रत्यारोपण शुरू कर दिया है। लिगामेंट इंजरीज शुरू कर इंजरी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है। इसके अलावा डेंटल ट्रीटमेंट यहां शुरू हो गया है जो कि ऑलमोस्ट जीरो था।
यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत
लखपति दीदी योजना के तहत शुरू हुआ किचन, आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
लखपति दीदी योजना के तहत यहां एक किचेन तैयार किया गया। एक अह प्लेटफॉर्म है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए योजना शुरू की गई। लखपति दीदी राजेश राजा बुंदेला ने बताया कि ललितपुर से नहीं हैं बल्कि छिपाई गांव से हैं। आता यहीं है। तीन साल से काम कर रही हैं। आगे बताया कि खुशी होती है। खाना बनाने में और खाना परोसने में बहुत अच्छा लगता है हमारे लिए मतलब कि जो हमारी जिंदगी इस तरीके से सुधरी है। पहले जो जिंदगी घर में कटती थी वो सही नहीं थी। हमारी सरकार ने इतना मौका दिया। हमारे लिए कि जो हमारी जिंदगी अच्छे खासे कट रही हो, बच्चों का भरण पोषण अच्छे से हो रहा है। पढ़ाई लिखाई अच्छे से हो रही है। हर चीज में हम आगे बढ़ रहे हैं। पहले घर में सब लोग परेशान भी करते थे। अब खर्चे में हर चीज में हर चीज से भरपूर हैं। पहले ऐसा था कि एक तरफ से पैसे आते थे तो उतना ही खर्चा होता था। जितना मतलब भरपूर भी नहीं हो पाता था। लेकिन अब ऐसा है कि दोनों तरफ से कमाते तो मौज होती है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा अच्छी तरह से उठता है। अब पहले के मुकाबले सोचना नहीं पड़ता है।
यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत