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मिट्टी के दीयों से जगमगाएगा ललितपुर

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दीपावली का पर्व आते ही दिये बनाता कुम्हार - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। कोरोना काल ने हर व्यवसाय पर बहुत बड़ा असर डाला है। दीपावली से सभी को अच्छे व्यापार की उम्मीद बंधी है। कुम्हार भी उत्साहित होकर अच्छे व्यापार के लिए दीये बनाने में जुटे हैं। वहीं, नगरवासियों ने भी इस बार दीपावली पर मिट्टी के दीये ही जलाने का संकल्प लिया है, लोगों का कहना है कि वह चीनी झालरों और दीयों का बहिष्कार करेंगे।
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महंगाई के बावजूद कुम्हारों ने इस बार पहले से अधिक मिट्टी खरीदी है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार मिट्टी के दीयों की खरीदारी जमकर होगी। उनका मानना है कि चीन निर्मित इलेक्ट्रानिक सामानों के बहिष्कार का बाजार पर असर पड़ा है। देश में निर्मित झालर और बिजली के सजावटी सामान काफी महंगे साबित हो हैं। इसलिए लोगों का रुझान मिट्टी के दीयों की तरफ रहेगा।
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दीयों के रेट- (प्रति सैकड़ा)
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लोकल दीये- 50 रुपये
उज्जैन के दीये- 200 रुपये
इंदौर के छोट दीये- 80 रुपये
इंदौर के बड़े दीये- 250 रुपये
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कैप्शन- विजय प्रजापति
दीयों की मांग अभी से बढ़ने लगी है। पहले से ही अधिक दीये खरीदने के लिए आर्डर मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मेटाडोर से दीये भेजे जा रहे हैं।
- विजय प्रजापति
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पहले जहां लोग 100 से 150 दीये खरीदते थे, इस बार 250 से अधिक की मांग कर रहे हैं। पहले एक ट्राली मिट्टी तीन लोग मिलकर खरीदते थे। इस बार अकेले खरीदी है।
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- जानकी प्रसाद प्रजापति
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मिट्टी की कीमतें बढ़ गई हैं। पहले जहां चार हजार रुपये प्रति ट्राली मिट्टी मिलती थी, इस बार पांच हजार रुपये में खरीदना पड़ा है।
- मोनू प्रजापति
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अभी करवा चौथ के लिए करवा बना रहा हूं। उसके बाद दीपावली में बच्चों के लिए गुल्लक समेत कई तरह के खिलौने और दीये बनाऊंगा।
- वीरेंद्र प्रजापति
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लोकल दीयों की मांग के अतिरिक्त झांसी, उज्जैन और इंदौर के दीयों की मांग भी बनी हुई है। इसलिए अभी से मंगा लिया हूं। गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियां आगरा से लेकर आता हूं।
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घनश्याम प्रजापति
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इस बार में मिट्टी के दीयों जलाकर दीपावली मनाएंगे ताकि कुम्हारों को भी काम मिल सके।
- संजय सोनी
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इस बार आंगन और छत पर मिट्टी के दीयों ही जलाएंगे ताकि अपनी परंपरा का निर्वहन पूरी तरह हो सके।
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देशी झालर काफी महंगे हैं। इससे अच्छा है दीपक जलाएं। इससे कुम्हारों को भी अच्छी आय हो जाएगी।
- प्रियंका
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चीनी झालरों और बल्बों का मैं पूरी तरह बहिष्कार करूंगी। देशी दीए घर में जलाऊंगी। उज्जैन के दीयों से रंगोली सजाऊंगी।
- प्रतिभा
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