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‘गंदा शहर’ के दाग से बचाएं

Fri, 06 Jan 2017 12:59 AM IST
lalitpur
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गंदगी - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। यदि आप अपने ललितपुर को गंदा शहर कहलाने के बचाना चाहते हैं तो आने वाले दिनों में स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब सूझबूझ से देना होगा। दरअसल चार जनवरी से देश भर के नगर निकायों में स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 शुरू कर दिया गया है। इसके तहत नगर पालिका परिषद ललितपुर की स्वच्छता को केंद्र सरकार की टीम तय दो हजार अंकों के मानक पर परखेगी। लेकिन, सरकार द्वारा स्वच्छता के लिए दिए गए आठ माह में नगर पालिका ने कोई तैयारियां नहीं की हैं। इसलिए अब अपने शहर की इज्जत हमें और आपको ही बचानी होगी। वहीं, केंद्रीय टीम के मानकों पर खरा उतरने पर नगर पालिका को सरकार की ओर प्रोत्साहन मिलेगा। बता दें कि इस सर्वेक्षण के लिए एक लाख से अधिक आबादी वाले देश भर के 500 नगर निकायों को चुना गया है।


मुहल्लों की सफाई व्यवस्था पर 900 अंक
सर्वेक्षण में सबसे अधिक अंक सफाई व्यवस्था पर दिए जाएंगे। इसमें शहर में झाड़ू लगाने के इंतजाम और कचरा निस्तारण की व्यवस्था पर मूल्यांकन होगा। वर्तमान सफाई व्यवस्था के अनुसार शहर के 30 प्रतिशत अंक मिलना भी कठिन बात है। 900 में से 360 अंक शहर में दोनों समय झाड़ू लगती है कि नहीं, यदि लगती है, तो कितने वार्डों में व कितने क्षेत्र में। साथ ही निकलने वाले कचरा का उठान समय से होता है कि नहीं।
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 शहर में एक दिन में दो बार तो झाड़ू लगाई जाती है, लेकिन शत-प्रतिशत क्षेत्रों में नहीं। वहीं, कचरे का उठान करने वाले वाहनों और इस सर्वेक्षण में हम भूमिका निभाने वाले डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की बात करें तो केवल वार्ड नंबर 26 महावीरपुरा में 90 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन प्रणाली लागू हो पाई है। वहीं कचरा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम नहीं लगा है। इसका भी असर सर्वेक्षण के मूल्यांकन पर पड़ेगा। इसी में 180 अंक कचरा निस्तारण के हैं। शहर से प्रतिदिन लगभग पांच मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसके निस्तरण के लिए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की व्यवस्था नहीं है और शहर का डंपिंग स्थल भी भरा है। इसके अलावा 135 अंक सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव व संरक्षण पर निर्धारित हैं। शहर में करीब चार हजार परिवार खुले में शौच के लिए जाते हैं यह आंकड़ा शहर के मूल्यांकन पर बुरा असर डाल सकता है। वहीं 45 अंक खुले में शौच मुक्त के लिए हैं, लेकिन शहर के समस्त 26 वार्डों में कोई भी वार्ड शत-प्रतिशत खुले में शौच मुक्त नहीं है।


जनता के जवाब पर निर्भर 600 अंक
600 अंक सर्वेक्षण टीम द्वारा जनता से पूछे गए सवालों पर निर्भर हैं। टीम करीब एक हजार नागरिकों से उनके घर में शौचालय की जानकारी लेगी। जवाब हां में मिलने पर पूरे 132 अंक मिलेंगे, जबकि शौचालय के लिए प्रयासरत होने जवाब पर आधे 66 अंक मिलेंगे। यदि शौचालय नहीं होने का जवाब दिया तो शून्य अंक मिलेगा। इसी तरह सामुदायिक शौचालय में मिलने वाली टैंप, फ्लश, हैंडवाश, दरवाजा, बिजली आदि सुविधाएं नियमित रूप से मिलने पर 62 अंक और कभी-कभी मिलने पर 42 अंक मिलेंगे। कभी-कभार सुविधा मिलने पर 20 अंक और कभी नहीं पर शून्य अंक मिलेंगे। इसके अलावा सामुदायिक व सार्वजनिक शौचालय की दूरी पर भी अंक निर्धारित हैं। यदि 500 मीटर की दूरी के अंतर्गत शौचालय है तो 64 अंक, एक किलोमीटर की दूूरी के भीतर तो 42 अंक और दो किलो मीटर दूरी के भीतर शौचालय है तो 20 अंक और यदि नहीं हो तो शून्य अंक मिलेंगेे। इसमें शहर को कम अंक मिल सकते हैं, क्योंकि शहर के करीब 20 वार्ड ऐसे हैं, जिनके तीन-चार किलोमीटर दूरी तक कोई सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

500 अंक सर्वेक्षणकर्ता पर निर्भर
दो हजार में से 500 अंक सर्वेक्षण कर्ता के भौतिक निरीक्षण पर मिलने हैं। इसके तहत केंद्रीय टीम शहर के प्रमुख बाजारों, धार्मिक स्थलों, आवासीय कालोनियों व शादी-विवाह घरों, होटलों, सब्जी मंडी, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा आदि स्थलों पर सफाई व्यवस्था व जन सुविधाओं पर 500 अंक देगी। इसमें भी शहर अच्छे अंक नहीं पा सकेगा, क्योंकि शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में कहीं पर भी सामुदायिक शौचालय नहीं है। इसके अलावा उक्त स्थलों पर हर सौ मीटर पर कूड़ादान की व्यवस्था भी नहीं है।

नहीं मिल पाएंगे प्रचार के 45 अंक
चार जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू हुआ है और चार जनवरी से ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता के अनुपालन में राजनीतिक होर्डिंगों को हटाने के साथ-साथ जिला प्रशासन ने नगर पालिका द्वारा शहर में लगे स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए जागरूकता वाले होर्डिंग, बैनर व पोस्टर निकाल दिए हैं। सर्वेक्षण के मूल्यांकन में पूरे 45 अंक प्रचार-प्रसार के लिए हैं, जो अब मिल पाना संभव नहीं है। शहर में कहीं पर भी स्वच्छ सर्वेक्षण व स्वच्छ भारत मिशन के तहत जागरूकता विज्ञापन व प्रचार सामग्री नहीं है।
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ईओ बोले, जनता से सहयोग मिलेगा
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने जनता से अपील की है कि स्वच्छ सर्वेक्षण के मूल्यांकन में शहर को अधिक से अधिक अंक दिलाने में विभाग को सहयोग करें। उन्होंने कहा कि वह अपने घरों का कचरा खुले में न डालते हुए विभाग के वाहनों में डालें। खुले में शौच जाने वाले लोग अपने नजदीकी सामुदायिक शौचालय का उपयोग करें और अपने घरों में शौचालय बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन जरूर करें। केंद्रीय टीम द्वारा पूछे गए सवालों का जागरूक नागरिकों की तरह जवाब दें। उन्होंने शहर को गंदा शहर कहलाने से बचाने की अपील की है।
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