ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मौजूदा वित्तीय वर्ष में काम की प्रगति को लेकर सस्पेंस पैदा हो गया है। एक तरफ विभागीय अफसर मजदूरों को काम दिए जाने की बात कर रहे हैं, वहीं विभागीय वेबसाइट पर कार्डधारकों द्वारा काम मांगने के बावजूद रोजगार की प्रगति शून्य दर्शाई जा रही है। ऐसे में मनरेगा की प्रगति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले में 1,74, 923 जॉब कार्डधारक परिवार पंजीकृत हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 11,012 कार्डधारक परिवारों ने काम की मांग की है। लेकिन, उन्हें काम नहीं दिया जा सका है। हालांकि, विभागीय अफसर इसे नकार रहे हैं। अफसरों का कहना है कि मजदूरों को रोजगार देने के साथ उसका मस्टररोल भी जारी कर दिया गया है, जबकि विभागीय वेबसाइट पर वर्तमान वित्तीय वर्ष में रोजगार सृजन की प्रगति शून्य दर्शाई जा रही है। इससे स्थिति अस्पष्ट हो गई है।
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2015-16 में मजदूरों ने कार्यस्थलों पर खूब मेहनत की, लेकिन उसका अभी तक उन्हें भुगतान नहीं हो सका है। इस समय जिले में मजदूरों का 770.26 लाख रुपये, अर्ध कुुशल व कुशल कारीगरों का 24.48 लाख रुपये और सामग्री 986.16 लाख रुपये का बकाया बना हुआ है, जिससे मजदूरों का मनरेगा से मोह भंग हो गया है। कइयों ने काम तो मांग लिया, लेकिन वह अब काम करने से कतरा रहे हैं। इसका असर वर्तमान वित्तीय वर्ष में दिखाई दे रहा है। जिले के 11,012 मजदूरों ने काम मांगने के बाद कार्यस्थल की ओर रुख नहीं किया है, जिस कारण कार्यस्थलों पर काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि शासन ने सूखे के मद्देनजर काम के दिनों में बढ़ोत्तरी कर दी है। यही हाल बना रहा तो कैसे शासन की मंशा पूरी हो पाएगी। इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
नाकाम हो रहे बीडीओ
पिछले भुगतान से परेशान मनरेगा मजदूरों को रिझाने में खंड विकास अधिकारी अभी तक नाकाम रहे हैं, जिससे कार्यस्थलों पर काम की प्रगति सामने नहीं आ पा रही है। सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर काम मांगने के बाद भी मजदूर कार्यस्थल पर नहीं पहुंचे हैं।
लखनऊ भेजी गई टीम
मजदूरों के भुगतान की समस्या को हल करने के लिए जिले से एक टीम लखनऊ गई है। जो बकाया समाप्त कराने की प्रक्रिया में जुटी है। इसी सप्ताह समस्या का समाधान होने की संभावना है।
मस्टररोल जारी कर दिए गए हैं, जिनकी फीडिंग नहीं हो सकी है। नियमत: पंद्रह दिनों में एमआईएस पर मस्टररोल की फीडिंग का प्रावधान है। मस्टररोल जल्द ही फीड करा लिए जाएंगे। जहां तक पिछले वित्तीय वर्ष के भुगतान की बात है तो उसके प्रयास किए जा रहे हैं। एक सप्ताह में इस समस्या का समाधान होने की संभावना है।
- नरेंद्र देव द्विवेदी
उपायुक्त (श्रम व रोजगार)