कुम्हैड़ी (ललितपुर)। बुंदेलखंड का ऐतिहासिक अंजनी मां मेला बृहस्पतिवार से शुरू हो रहा है। मेला एक सप्ताह तक चलेगा। यह पशु मेला के नाम से भी प्रसिद्ध है।
जिला मुख्यालय से 48 किमी दूर महरौनी तहसील के ग्राम कुम्हेड़ी में खेतों के बीच मां अंजनी का मंदिर है। कुम्हैड़ी में मां अंजनी के नाम से मेला की शुरुआत सन 1949 से हुई थी। इसमें समाजसेवी स्व.
नाथूराम पलया का विशेष योगदान माना जाता है। सौ एकड़ से अधिक जगह में लगने वाले इस मेले में ग्रामीणों के उपयोग में आने वाली सभी वस्तुओं की दुकानें लगाई जाती हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौनों की दुकानें एवं झूले आकर्षण का केंद्र होते हैं। यहां लगने वाला मेला पशुओं की खरीद-फरोख्त के नाम से जाना जाता हे।
मेला के चार दिन पहले से पशु व्यापारियों की आवाजाही शुरू हो गई थी और अब तक पांच हजार से अधिक पशु मेला में आ चुके हैं। जानवरों को पानी के लिए जामनी नहर खोल दी गई है। हालांकि, मेला में
सूखे का असर भी देखने को मिल रहा है। किसान औने-पौने दामों में जानवर बेचने को लालायित हैं। इस बारे में जब उनसे बात हुई तो किसानों ने बताया कि सूखा पड़ने के कारण न खाने को अनाज है और न ही जानवरों को भूसा की व्यवस्था है। जब पानी बरसेगा तो फिर से जानवरों का इंतजाम कर लिया जाएगा।
मेला के लिए प्रशासन द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लोगों में उत्साह है, मेले में माता अंजनी के दर्शन करने दूर-दूर से लोग आते हैं। एसडीएम महरौनी ए दिनेश कुमार ध्वजारोहण कर मेला का शुभारंभ करेंगे। सात दिन तक चलने वाले इस मेला में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां अंजनी के दरबार में शीश झुकाकर मन्नत मांगते हैं। मंदिर के समीप पीपल के वृक्ष के नीचे जमीन से माता अंजनी की दिव्य प्रतिमा निकली थी। साथ में हनुमान जी महाराज बालस्वरूप में मां की गोद में विराजमान हैं। लोगों की मान्यता है कि बच्चों को कैसा भी सूखा रोग हो, माता के दरबार में स्नान कराने से ठीक हो जाता है। इसको लेकर लेकर कथा भी प्रचलित है।
इसमें एक महिला जो अपने पुत्र को स्नान कराने दरबार में आई थी, वाहनों के अभाव में पैदल मंदिर तक गई। रोग से ग्रसित होने के कारण बालक की रास्ते में मृत्यु हो गई, लेकिन माता में आस्था होने के कारण वह मंदिर तक आई और विलाप करने लगी। कुछ समय बाद बालक के रोने की आवाज आई तो मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस घटना से पूरे क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा बढ़ी और तभी से लोग बड़ी संख्या में बच्चों को स्नान कराने मंदिर आने लगे।
तीन फन वाले शेषनाग
मां अंजनी के दरबार में पंचमुखी हनुमानजी की प्रतिमा स्थित है। ऐसी प्रतिमा आसपास के क्षेत्र में कहीं भी नहीं है। हनुमानजी की यह प्रतिमा पूर्वमुखी है। मंदिर परिसर में तीन फन वाले शेषनागजी की प्रतिमा माता के सिंहासन के ठीक सामने कुछ दूरी पर स्थित है।
वर्ष भर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में माथा टेकते हैं। मान्यता है कि बच्चों की बीमारी माता के दरबार में स्नान कराने से दूर हो जाती है।
- राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, पुजारी