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हद पार कर दी थी कोतवाल ने, 42 दिनों में लगा दी थी एफआर

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महरौनी (ललितपुर)। कोतवाली महरौनी के एक गांव में चार वर्ष पहले महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोपियों को बचाने के लिए तत्कालीन कोतवाल ने सारी हदें पार कर दी थीं। मामले में घटना से दो माह बाद कोतवाली महरौनी पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और इसमें मात्र 42 दिनों में ही मामले की विवेचना पूरी करके अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी। बाद में मामला सीबीसीआईडी तक पहुंचने से तत्कालीन कोतवाली प्रभारी आखिरकर फंस ही गए और अब सीबीसीआईडी द्वारा उन पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
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कोतवाली महरौनी अंतर्गत एक ग्राम निवासी व्यक्ति ने चार वर्ष पूर्व न्यायालय को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि गांव के तीन आरोपियों महेंद्र सिंह व इंदर सिंह (दोनों भाई) एवं दल सिंह ने उसकी पत्नी के साथ 12 अप्रैल वर्ष 2017 को सामूहिक दुष्कर्म करके उसे आम के पेड़ पर फांसी के फंदे पर लटकाकर हत्या कर दी थी। इस मामले में न्यायालय के आदेश पर कोतवाली महरौनी में तीनों आरोपियों के खिलाफ 18 जून 2017 को धारा 376डी व 302 के तहत मुुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद विवेचक तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महेश चंद गौतम ने मात्र 42 दिनों में विवेचना पूरी करके 30 जुलाई 2017 को अंतिम रिपोर्ट लगाकर मामला खत्म कर दिया था।
उधर, इस कार्रवाई से आहत पीड़ित ने मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रार्थना पत्र भेज दिया। जिस पर शासन द्वारा 26 मार्च 2018 को इस प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी से कराने के आदेश दिए गए थे। सीबीसीआईडी द्वारा 23 जनवरी 2021 को अपनी जांच पूरी की और इस मामले में झूूठी अंतिम रिपोर्ट लगाने के मामले में सीबीसीआईडी निरीक्षक कानपुर सुभद्रा वर्मा की तहरीर के आधार पर बीते रोज बृहस्पतिवार को महरौनी पुलिस ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक महरौनी महेश चंद गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है और इस मुकदमे की विवेचना भी सीबीसीआईडी को ही सौंपी गई है।
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मुरादाबाद में सीओ हैं तत्कालीन कोतवाल
वर्तमान में यहां के तत्कालीन कोतवाल मुरादाबाद में सीओ हैं। जांच में पता चला है कि महिला के साथ हुई घटना की एफआईआर दर्ज कराने के लिए परिजन थाने के चक्कर लगाते रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी थी। पुलिस ने घटना के बाद पुलिस की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने केवल घटना का तस्करा हैंगिंग में दर्ज कर पोस्टमार्टम करा दिया था। घटना को लेकर अफसरों को भी गुमराह किया था। ऐसे में पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय भी नहीं मिल सका। पुलिस भी परिजनों की कोई सुनवाई नहीं कर रही थी। अब मामला दर्ज होने के बाद उनके चर्चे हो रहे।
दर्ज होंगे बयान, पूरे मामले की होगी विवेवना
पूरे प्रकरण में अब मामला मुख्यालय जाएगा। इसके बाद कानपुर से विवेचना अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। मामले की विवेचना होगी। इसमें तत्कालीन कोतवाल के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। महिला के कपड़ों को फॉरेंसिक लैब, विसरा परीक्षण लैब न भेजने को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।
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पूरे केस में खुद वादी हूं। जांच के बाद ही मामला दर्ज हुआ है। अब मामले में विवेचना भी शुरू होना है। मुख्यालय से विवेचना अधिकारी नियुक्त होगा।
सुभद्रा वर्मा, अपराध शाखा अपराध अनुसंधान खंड कानपुर
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