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कोई आत्महत्या की बात करें तो न करे नजरअंदाज

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कोई आत्महत्या की बात करे तो न करें नजरअंदाज
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ललितपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं एवं मजदूर वर्ग के लोगों में आर्थिक, व्यक्तिगत और सामाजिक कारणों से परेशान द्वारा आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैँ। एक महीने में बारह लोगों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मनोविशेषज्ञ कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या की बात करता है तो उसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके कारणों को जानकर समस्या का हल निकालना चाहिए।
जनपद में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग हर सप्ताह में तीन से चार मामले फांसी लगाकर आत्महत्या करने के सामने आ रहे हैं। पिछले 20 जून से अब तक तीन महिलाआें समेत 12 लोगों ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है, हालांकि कई मामलों में आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए। इनमें 22 से 30 वर्ष के लोगों की संख्या अधिक है। कुछ लोग चालीस वर्ष से अधिक के किसान व मजदूर भी हैं, जिन्होंने फांसी लगाकर जान दी। अधिकांश मामलों में मजदूर, किसान एवं महिलाओं के मामले में गृहकलह और दहेज का कारण सामने आ रहा है। एक मामले में 15 वर्षीय किशोरी द्वारा फांसी लगाने का मामला सामने आया था।
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इस मामले में जब मनोविशेषज्ञ डॉ. अवधेश अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने आत्महत्या करने के मामलों में सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत तीन कारण बताए। ऐसे लोग डिप्रेशन यानि अवसाद से ग्रसित हो जाते हैं और इनमें जीने की इच्छा खत्म हो जाती है। आर्थिक कारणों से ग्रसित व्यक्ति या तो कर्ज से परेशान होता है या फिर उसकी आर्थिक स्थित इतनी खराब होती है कि घर में लड़कियों की शादी या परिवार में किसी के बीमार होने पर इलाज कराने में असमर्थ होगा। वह अपने आपको कोसता हुआ, आत्महत्या जैसा निर्णय कर लेता है। कुछ मामले सामाजिक भी होते हैं और व्यक्तिगत भी, जिनमें ऐसा व्यक्ति किसी के द्वारा खुद पर लगाए झूठे आरोपों से मानसिक रुप से परेशान रहने लगता है और वह आत्महत्या का विचार करने लगता है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में ऐसे व्यक्ति आत्महत्या करने से पहले अपने परिजन, दोस्त या फिर किसी खास मिलने वाले से आत्महत्या करने की बात कहता है या आत्महत्या करने जैसे उदाहरण देकर जीवन खत्म करने की बात करता है। युवाओं द्वारा अधिकांशत: आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने, गलत संगत में पड़ने और बाद में खुद को आत्मग्लानि महसूस होने पर ऐसे कदम उठा लिए जाते हैं।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि यदि थोड़ा भी अहसास हो जाए या कोई व्यक्ति आत्महत्या करने जैसी बातें करने लगे तो परिजनों को चाहिए कि उन पर विशेष नजर रखें। उन्हें अकेला नहीं छोड़ें। क्योंकि, ऐसे लोग कहीं भी आने- जाने से बचते हैं और मौका देखकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। यदि कोई शंका है तो पहले कारण जानकर उसका समाधान निकालें और समझाने का प्रयास करें। समझाएं कि जीवन रहने पर उससे बेहतर कर सकते हैं। इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह आत्महत्या का विचार त्याग सकता है।
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काउंसलिंग सेल से 25 लोगों को मिला लाभ
मनोविशेषज्ञ और प्राचार्य डॉ. अवधेश अग्रवाल ने बताया कि नेहरू महाविद्यालय में मानसिक रुप से अवसाद ग्रस्त लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए काउंसलिंग सेल संचालित है। इसमें वह खुद और उनके साथी डॉ. संजीव शर्मा लोगों की समस्याओं को मनोवैज्ञानिक तरीके से दूर करने के उपाय सुझाते हैं। अब तक 25 लोगों की समस्याएं जानकर उन्हें जीवन की नई राह दिखाई गई। ऐसे लोग यहां आकर अपनी परेशानी मनोविश्लेषकों को बेहिचक बता सकते हैं और उनकी कोई भी बात जो उनके द्वारा बताई जाती है, वह पूर्ण रुप से गोपनीय रखी जाती है।
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