जिले में बगैर लाइसेंस के खनिज टालें धड़ल्ले से चल रही हैं। इससे खनिज विभाग को जहां राजस्व की क्षति पहुंच रही है। वहीं, यातायात की सुगम व्यवस्था बनाने में भी परेशानी होती है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
योगी सरकार ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है। इसके बाद भी अवैध खनन पर लगाम नहीं लग पा रही है।
इसका ताजा उदाहरण खनिज टालें हैं। नगर में ही अधिकांश सड़कों पर इन दिनों खनिज भंडारण नजर आ रहे हैं। कहीं बालू तो कहीं इमारती पत्थर व गिट्टी के ढेर लगे हैं। जिसमें सर्वाधिक अवैध टालों का संचालन शहर में देवगढ़ रोड़, तालाबपुरा, सिविल लाइन, खिरकापुरा, कैलगुवा रोड, बस स्टैंड, बुढ़वार रोड पर देखी जा सकती हैैं। कई जगहों पर टालों पर रखी सामग्री सड़क पर आ गई है। जिसमें गिट्टी व बालू बिक्री का कारोबार किया जा रहा है। इन टालों से आए दिन जाम की स्थिति भी बनी रहती है। यही नहीं, ऐसे स्थानों पर वाहनों को ओवर टेक करने में भी परेशानी होती है।
इन टालों के चलते कई दुर्घटनाएं घटित हो चुकी हैं। कई बार तो दुपहिया वाहन चालक बालू पर फिसलकर गिर चुके हैं। हालांकि, शासन ने खनिज टालें खोलने के लिए कई नियम कायदे बनाए गए हैं। लेकिन जिले में इन पर पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है। जिससे अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी कार्रवाई के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
चिह्नित जगह से दूसरी जगह चल रही कई टालें
जिले में कई ऐसी भी टालें हैं जिन्हें विभाग ने चिह्नित स्थल पर कारोबार करने की अनुमति दी है। इसके बाद भी कई टालें अन्य जगहों पर चलाई जा रही हैं। लगभग अधिकांश टालें नियम विपरीत सड़क किनारे संचालित हो रही हैं।
सड़क किनारे पड़े भंडारण की जांच की जा रही है। जानकारी मिली है कि छोटे-छोटे बालू व गिट्टी के ढेर लगे हुए हैं, जो निजी उपयोग में लाए जा रहे हैं। यदि ज्यादा भंडारण पाया जाएगा तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आरपी सिंह
जिला खान अधिकारी