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कांशीराम कॉलोनीवासी जनप्रतिनिधियों से नाराज

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प्रशासन - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। रघुवीर सिंह महाविद्यालय के पास स्थित मान्यवर कांशीराम आवासीय कॉलोनी के निवासी पांच साल से लगातार बिजली और पानी की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं होने पर उनका धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने कॉलोनी में बोर्ड और जगह-जगह स्टीकर लगा दिए हैं कि कि पानी व बिजली की मांग पूरी नहीं होती है तो वह मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे।      
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में निर्धन परिवारों को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए मान्यवर कांशीराम के नाम से जगह-जगह कॉलोनियों का निर्माण कराया गया था। इन्हीं में से एक रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय के पास कालोनी है। इसका निर्माण मायावती सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद हो सका था। तब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में आवासों का निर्माण पूरा कराया गया और जरूरतमंदों को आवास आवंटित कर दिए गए। उस दौरान अधिकारियों ने कॉलोनी में बिजली और पानी की कमी को जल्द पूरा करने का आश्वासन देकर आवंटियों को संतुष्ट कर दिया। लेकिन, धीरे-धीरे दिन गुजरने लगे और अधिकारियों ने कॉलोनी की ओर रुख करना बंद कर दिया। इसके बाद कॉलोनीवासियों ने घरों से निकलकर अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काटने शुरू कर दिए। लेकिन, कॉलोनीवासियों को केवल आश्वासन ही मिलता कि बिजली और पानी की सुविधा दे दी जाएगी।
कॉलोनी में अंधेरा बरकरार रहने से अनहोनी की घटनाएं शुरू हो गई। कुछ लोग अंधेरे में छत से गिर गए तो बरसात के समय जहरीले कीड़ों ने लोगों को काटना शुरू कर दिया। इसे देख कॉलोनीवासियों ने फिर अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया। कॉलोनीवासियों ने 17 जुलाई 2018 को बिजली व पानी की व्यवस्था कराने के लिए डीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ को भी ज्ञापन दिया। इसमें बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई और गर्मी में लोगों के बीमार होने की पीड़ा दर्शाई। इस पर उन्होंने अधिशासी अभियंता विद्युत को कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया।
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सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने 20 जून 18 को पत्र के माध्यम से कॉलोनी में विद्युतीकरण कराने के लिए प्रस्तावित एस्टीमेट की प्रति अधिशासी अभियंता विद्युत से मांगी थी। इसके अनुपालन में 21 जून 18 को विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता आकाश सचान ने सदर विधायक को पत्र लिखकर एस्टीमेट बनाए जाने की जानकारी दी थी। इसमें बताया गया कि कॉलोनी में विद्युतीकरण के लिए भौतिक निरीक्षण किया गया है। इसका एस्टीमेट 64,66,651 रुपये का तैयार हुआ है। इससे पहले भी विद्युतीकरण के लिए एस्टीमेट तैयार कराया गया था। इसके अंतर्गत 31 मार्च 2015 में तत्कालीन एसडीओ विद्युत अखिलेश कुमार ने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड को पत्र लिखा था। इसमें बताया गया था कि कॉलोनी में 42 ब्लाकों में 500 आवासों का निर्माण किया गया है, जहां बिजली के लिए एस्टीमेट तैयार किया गया है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता विद्युत डीआर विमलेश ने डीएम के निर्देश पर स्थलीय परीक्षण कराया था।
कॉलोनी निवासिनी कल्लू का कहना है कि चार साल से बगैर लाइट के रह रहे हैं। वहीं, लक्ष्मी कहती हैं कि उन्हें कॉलोनी में पांच साल होने जा रहे हैं। कॉलोनी में बिजली व पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। रामदेवी व ज्योति रात्रि में मच्छरों से परेशान हैं। मजबूरन, कॉलोनीवासियों ने मतदान नहीं करने का सामूहिक निर्णय लिया है।

कॉलोनी में साफ-सफाई ठीक नहीं होने से मच्छर बहुत हैं। मच्छरों से निपटने के लिए रोजाना दस रुपये की अगरबत्ती खरीदनी पड़ती है, तब जाकर भरपूर नींद आती है। वर्तमान में आमदनी कम है तो यह खर्चा अलग से झेलना पड़ रहा है।   
- नूरजहां

छत पर कपड़ा व अन्य सामान रखे होने की स्थिति में लोग ऊपर चले जाते हैं। यदि शाम का समय हो तो छत का छोर नजर नहीं आता है और लोग छत से नीचे गिर जाते हैं। इस तरह कॉलोनी में कई लोगों की हड्डियां टूट चुकी हैं।
- अनिल कुमार

कॉलोनी में बिजली के अभाव में लोगों को मोमबत्ती व लालटेन जलानी पड़ती है। बीते महीनों में एक वृद्ध दंपति की मौत मोमबत्ती कपड़ों में गिर जाने से हो गई थी। इस दौरान धरना प्रदर्शन करने पर विद्युतीकरण का आश्वासन दे दिया गया था, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
- संजय मिकी

कॉलोनी में बिजली व पानी की समस्या है। यहां के लोग हैंडपंप पर ही निर्भर हैं। गर्मी आते ही हैंडपंपों से पानी कम निकलने लगा है। इससे पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। यही हाल बिजली का है। इन दोनों की कमी के चलते कई लोग अन्य जगहों पर रहने लगे हैं।
- सफीना बेगम

कॉलोनी में बिजली की व्यवस्था बनाने के लिए कार्रवाई चल रही है। डीएम स्तर से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बजट की मांग भी की गई है, लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण बजट अवमुक्त नहीं हो पाया है। अब चुनाव के उपरांत ही बजट मिल पाएगा।
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- गजल भारद्वाज, एसडीएम सदर
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