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मैला पानी बना जलसंस्थान व नागरिकों के लिए मुसीबत

Mon, 11 Jul 2016 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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dam, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। विगत दिनों हुई झमाझम बारिश से पूरा जनपद जलमग्न हो गया है, लेकिन इन दिनों में शहर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो गई है। बांध से मैला पानी आने के कारण आधी मात्रा में ही पानी का फिल्ट्रेशन (शुद्धीकरण) हो पा रहा है, जिससे पेयजल आपूर्ति कम हो पा रही है और आपूर्ति हो रहे पानी में गंदगी होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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कम आपूर्ति होने से लोगों को पेयजल का इंतजाम करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। नगर क्षेत्र में पेयजल की आपूर्ति गोविंद सागर बांध को साफ करके की जाती है। भारी बारिश के चलते गोविंद सागर बांध में विभिन्न नालों से गंदा पानी पहुंच रहा है। पानी में मिट्टी और गंदगी ज्यादा होने के कारण जल संस्थान को पानी को पीने योग्य बनाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

पहली बारिश के कारण नालों की गंदगी व मिट्टी कट कर पानी के साथ बहकर बांध में आ रही है। पानी में मिट्टी की मात्रा अधिक होने के कारण बहुत कम मात्रा में ही पानी का फिल्ट्रेशन हो पा रहा है। काफी मेहनत के बाद भी पानी पूरी तरह से शुद्ध नहीं हो पा रहा है। कम मात्रा में पानी फिल्ट्रेशन होने के कारण पानी की जलापूर्ति भी खपत के अनुरूप कम हो पा रही है। इससे स्थानीय लोगों को पानी के लिए काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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गंदे पानी से होती हैं बीमारियां
यदि पीने का पानी दूषित है तो कई बीमरियां चपेट में ले सकती हैं, इन पानी में वाइरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ प्रमुख रूप से होते हैं। इन्हें पीने से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जिसकी वजह से हैजा, टाइफाइड, पेचिश जैसी बीमारियां आसानी से किसी को भी अपना शिकार बना सकती हैं। इसके अलावा गंदा पानी पीने से वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है। वायरल इंफेक्शन के कारण हेपेटाइटिस ए, फ्लू, कॉलरा, टाइफाइड और पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां  होती हैं। 

लगातार बारिश होने के बाद गोविंद सागर बांध में सिमट रहा पानी मिट्टी व गंदगी से भरा हुआ है। इस पानी को फिल्टर करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। जलसंस्थान द्वारा लगातार शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आमजन भी इस मौसम में पानी को उबालकर उपयोग में लाए। 
 - वीरेंद्र श्रीवास्तव अवर अभियंता जलसंस्थान 


विभाग द्वारा समय समय पर पेयजल के नमूने भरकर लखनऊ प्रयोगशाला भेजे गए हैं। बारिश को ध्यान में रखते हुए हर 15 दिन में नमूने लिए जाएंगे और गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। जल संस्थान को लीकेज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे कि गंदा पानी आम जन को आपूर्ति न हो सके। 
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 - डा. राजेश भारती नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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