जिला अस्पताल भी पीने के पानी की समस्या से उबर नहीं पा रहा है। करीब एक माह से अस्पताल में पानी की समस्या बनी हुई है। तीन में से एक वाटर कूलर ही काम रहा है। जिस कारण यहां भर्ती अधिकांश मरीजों के साथ तीमारदार को अस्पताल परिसर की प्याऊ से पानी जुटाना पड़ रहा है। कई तीमारदार बाजार से ठंडी बोतल खरीदकर पानी ला रहे है।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को उपचार के साथ ही खाना की सुविधा मुहैया कराई जाती है। जिसमें सुबह व शाम का भोजन भी मिलता है। लेकिन इन दिनों शीतल पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। हालांकि, यहां तीन वाटर कूलर लगाए गए हैं लेकिन इनमें से एक ही काम कर रहा है। जो वाटर कूलर खराब पड़े हैं, उन्हें सुधारा नहीं जा रहा है। बीते कई माहों से यहां पर लगे वाटर कूलर खराब पड़े हुए हैं। जिनकी अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। मरम्मत के अभाव में तीसरे तल पर भर्ती मरीजों व तीमारदारों को ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही दूसरे तल पर बने वार्डों में भी पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
वहीं इमरजेंसी व ओपीडी समय पर उपचार के लिए आने वाले लोगों को पेयजल के संकट से जूझना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, यहां पर भर्ती मरीजों व तीमारदारों को ठंडे पानी की तरसना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ तीमारदार अस्पताल परिसर के बाहर दूरी पर लगे हैंडपंप से पानी ला रहे हैं। कुछ तीमारदार अस्पताल परिसर के आस पास से पानी लाने को मजबूर बने हुए हैं। वहीं, कुछ मरीज व तीमारदार प्याऊ से पानी पीकर अस्पताल में बने हुए हैं।
पानी के लिए पूर्व में तीन वाटर कूलर लगाए गए हैं। जो खराब पड़े हैं। बजट के अभाव में मरम्मत नहीं हो पा रही है। दो किलोवाट की मोटर क्रय की गई है। जिससे पेयजल की सुविधा कराई जाएगी।
- एसके वासवानी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक