पुलवारा/ललितपुर। ब्लॉक तालबेहट के रजपुरा गांव के पास स्थित सिद्ध क्षेत्र झूमरनाथ धाम मंदिर में भगवान शिव पिंडी रूप में गुफा में विराजमान हैं। यह धार्मिक स्थान लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले लोगों की मनोकामनाएं भगवान शंकर पूरी करते हैं।
मान्यता है कि शिवलिंग लगभग 17वीं शताब्दी में रजपुरा एवं आसपास के गांव के लोगों को भगवान शिव ने एक ही रात में स्वप्न दिया था कि ग्राम रजपुरा एवं बठवाहा की पहाड़ी पर स्थित गुफा में एक शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। दूसरे दिन जिन लोगों को यह सपना दिया था, उन्होंने गांव वालों को स्वप्न के बारे में बताया। इसके बाद गांव के लोग एकत्रित होकर उक्त स्थान पर गए। वहां गुफा में पहुंचकर देखा तो भगवान शिव पिंडी के रूप में विराजमान थे। तभी से वहां पर पूजा-अर्चना शुरू हो गई। यहां पर सावन मास में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आकर प्रभु भक्ति करते हैं।
प्रभु दर्शन की डगर है जर्जर
ब्लॉक बार से पारौन होते हुए जो मार्ग मंदिर के लिए गया है, वह जर्जर है। सड़क पूरी तरह खराब हो चुकी है। जगह-जगह मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। इस कारण लोग यहां पहुंचने में असहज महसूस करते हैं। यही हाल तालबेहट से आए हुए रास्ते का भी है। ऐसे में बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं को इन मार्गों से होते हुए मंदिर तक पहुंचने में काफी परेशानियों से जूझना पड़ पड़ता है।
प्रख्यात तांत्रिक चंद्रास्वामी ने किया था महायज्ञ
देश-विदेश के राजनेताओं से घनिष्ठ संबंध रखने वाले प्रख्यात तांत्रिक चंद्रास्वामी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के किसी कार्य सिद्धि के लिए 1991 में झूमरनाथ धाम में महायज्ञ किया था। इसके लिए उन्होंने बनारस स्थित दुर्वासा आश्रम के महंत संतोषी महाराज को महायज्ञ की जिम्मेदारी दी थी। संतोषी महाराज ने झूमरनाथ गुफा के समीप विशाल यज्ञशाला का निर्माण कराया था।
मंदिर का ऐसे नाम पड़ा झूमरनाथ
ग्रामीणों के अनुसार ब्रिटिश शासन काल में जब जिला झांसी था। उस समय पुलिस महकमे के एक आला अधिकारी के यहां संतान नहीं थी। वो पुलिस अधिकारी जब इस मंदिर पहुंचा तो उन्होंने अपनी परेशानी पुजारी को बताई। पुजारी ने कहा कि आप भगवान शिव से अपनी प्रार्थना कीजिए, आपकी मनोकामना पूरी होगी। ऐसा हुआ भी। पुलिस अधिकारी को वहां इच्छा के अनुसार पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद उन्होंने प्राचीन शिवलिंग पर झूमर चढ़वाए। तभी से इस मंदिर का नाम झूमरनाथ पड़ गया। एक खास बात ये भी है कि झूमरनाथ धाम में महाशिवरात्रि पर मेला लगता था। यह मेला जिले का पहला प्रशासन पंजीकृत मेला था।
झूमर नाथ मंदिर की विशेषताएं
यहां पर भगवान शिव को अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है। जब भी लोग भगवान शिव की परिक्रमा लगाते हैं तो उनकी आधी ही परिक्रमा लगाई जाती है। झूमरनाथ मंदिर में भगवान शिव की परिक्रमा लगाने के लिए गुफा के नीचे परिक्रमा है, जो प्राकृतिक रूप से आधी ही है, वो किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसी तरह, हिंदू मान्यता के अनुसार मंदिर के ऊपर कलश को शुभ माना जाता है। उसी तरह, इस प्राकृतिक शिवलिंग गुफा के ऊपर भी कलश नुमा पत्थर स्थापित हैं, जिससे यह अपने आप में अद्भुत है।