ललितपुर। जनता कर्फ्यू को एक साल पूरा हो गया है। ठीक एक साल पहले 22 मार्च 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सहयोग मांगते हुए एक दिन का कर्फ्यू लगाया था। आज हाथ धोना और मास्क पहनना जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित प्रिय जैन कहते हैं कि जनता कर्फ्यू शब्द ही लोगों के लिए बेहद नया था, लेकिन कोरोना शब्द कुछ दिन पहले से डराने लगा था। लोगों ने अपने आप को स्वेच्छा से खुद को पूरी तरह से बंद कर लिया था। इसके तुरंत बाद लॉकडाउन का ऐलान हो गया। वायरस को रोकने के लिए ये बेहद जरूरी कदम था और इस वजह से ही भारत में पूरे विश्व के मुकाबले मृत्यु दर कम है। इस दौरान प्रवासी मजदूरों के पलायन के समय अन्नपूर्णा भोजनशाला ने पूरे कोरोनाकाल में सभी जरूरतमंदों को नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराया। मेडिकल परीक्षा की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र हर्षवर्धन ने उस वक्त को याद को करते हुए बताया कि वह होली की छुट्टियों पर अपने घर ललितपुर आया हुआ था। कुछ दिन बाद ही जनता कर्फ्यू और फिर लॉकडाउन का सामना करना पड़ा। यह कोरोना रोकने के लिए अच्छा कदम था। लेकिन एकदम से घोषित हुए लॉकडाउन से पढ़ाई पर गहरा असर हुआ था, लेकिन कोरोना के आने बाद ऑनलाइन क्लासेस कोर्स पूरा करने के लिए जरूरी हिस्सा हो गई थीं। बताया कि ऑनलाइन क्लास को लंबे समय तक अटेंड करने से सर्वाइकल और आंखों में दर्द का सामना करना पड़ा।