संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बांध पुनर्वास और सुधार योजना के तहत चयनित जामनी बांध के जीर्णोद्धार का काम फंस गया है। इस वित्तीय वर्ष में दो बार निविदा प्रक्रिया की गई, लेकिन वह सफल नहीं हुई। अब वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के चलते सिंचाई विभाग ने शासन से मिली 7.30 करोड़ की धनराशि को सरेंडर करने का प्रस्ताव दिया है।
जामनी नदी पर मड़ावरा क्षेत्र में बांध का निर्माण 1973 में हुआ था। यह जिले के प्रमुख बांधों में शुमार है। इसे विश्व बैंक की पुनर्वास और सुधार योजना ड्रिप फेज-2 के लिए चयनित किया गया था। बांध के जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक और राज्य सरकार धनराशि देती है। सिंचाई विभाग ने जामनी बांध के लिए 19 करोड़ रुपये की मांग की थी। करीब 17.92 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। कुछ माह पूर्व शासन ने 7.30 करोड़ की धनराशि सिंचाई विभाग को जारी की थी। जुलाई 2023 में निविदा प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन निविदा एकल रह जाने के चलते इसे निरस्त कर दिया गया था।
दिसंबर-जनवरी में दोबारा निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन इस बार भी निविदा एकल रही। इस कारण फिर से निरस्त कर दिया गया था। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है। इस कारण सिंचाई विभाग ने शासन से जामनी बांध के जीर्णोद्धार के लिए मिली 7.30 करोड़ रुपये की धनराशि को सरेंडर करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब अगले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह प्रक्रिया पुन: शुरू की जाएगी। अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष में जामनी बांध का जीर्णोद्धार शुरू हो जाएगा।
कराए जाने हैं ये काम
जीर्णोद्धार के काम में गेटों को ऑटोमेटिक कर उनका आधुनिकीकरण करना, बांध के अप स्ट्रीम में पिचिंग, कंक्रीट स्पिल वे का निर्माण, सीपेज-लीकेज में सुधार, गेटों के पास सोलर लाइट, डाउन स्ट्रीम का सुदृढ़ीकरण, पैराविट की मरम्मत, नहरों के गेटों पर सुरक्षा शेड लगाए जाने थे। साथ में बांधों की सुरक्षा ड्यूटी सहित निगरानी के लिए टाइप वन स्तर के आवासों का निर्माण शामिल है।
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पिछले वित्तीय वर्ष में भी धनराशि हुई थी सरेंडर
पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी जामनी बांध के जीर्णोद्धार के लिए 3.60 करोड़ की धनराशि को सरेंडर किया गया था। इसका कारण था निविदा प्रक्रिया करने के लिए विश्व बैंक ने अनुमति पत्र नहीं दिया था।
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शासन द्वारा निर्गत धनराशि को समर्पण करने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है। अब अगले वित्तीय वर्ष में यह प्रक्रिया पुन: शुरू की जाएगी।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड