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पर्यावरण का संरक्षण, मानव जीवन का आधार

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पौध रोपण करते बच्चे - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर के प्रबुद्व लोगों ने पर्यावरण को बचाए रखने के लिए संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि वर्तमान परिवेश में पर्यावरण इतना दूषित हो गया है कि उसे बचाना बहुत ही टेढ़ी बात हो गयी है। सबसे ज्यादा प्रदूषण पॉलीथिन से ही फैल रहा है। जिससे चारों ओर का वातावरण प्रदूषण युक्त हो गया है। पॉलीथिन को खाकर जानवर भी खत्म हो रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाना है तो हमें प्रदूषण पर नियंत्रण करना होगा। इस दौरान अक्षय अलया ने कहा कि एक वृक्ष अपने घर, आंगन, मोहल्ले में जरूर लगाएं। क्योंकि वृक्ष की तुलना संतान से की गई है, तो नदी की तुलना मां से की गई है। उन्होंने कहा कि घर के आंगन मस्त्रत्त्ें एक तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। तुलसी का पौधा मनुष्य को सबसे अधिक ऑक्सीघजन देता है। तुलसी के पौधे में अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। पीपल के वृक्ष की भी पूजा की जाती है जो अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देता है। शिक्षाविद् केपी पाण्डेय ने कहा कि विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को उनके विद्यार्थी जीवन से ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ायें। बच्चों के मन के अंदर पर्यावरण संरक्षण के प्रति रुचि जागृत कर सकते हैं। बच्चे ही इस देश का भविष्य हैं। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागृत भी कर सकते हैं। संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने कहा कि आज वर्तमान परिवेश में ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ता प्रदूषण और कम होते जंगल हमें संकेत दे रहे हैं कि हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है। पर्यावरण को अधिक से अधिक मजबूत बनाएं ताकि शुद्ध हवा मिल सके। बृजेश कुशवाहा ने कहा कि प्लास्टिक से बनने वाले प्रोडक्ट ही प्रकृति को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए प्लास्टिक को हमेशा के लिए खत्म होनी चाहिए। प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग बढ़ गया है। पर्यावरण के लिए हानिकारक है। वर्तमान समय में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। विवेक व्यास ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 को पर्यावरण की श्रेणी में रखा गया है। पश्चिम के देशों ने तो हद से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। पेड़ काटकर जंगल के कंक्रीट खड़े करते समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि इसके क्या दुष्परिणाम होगें। आज हमें आवश्यकता है कि हम अपने पर्यावरण की रक्षा करें।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर करुणा केंद्र ललितपुर द्वारा संगोष्ठी हुई जिसमें महामंत्री ध्रुव साहू, राजेश दुबे, कौशल किशोर गोस्वामी, राजेंद्र सिंह, आकाश मसीह, विवेक व्यास, संतोष कुशवाहा, ब्रजेश कुशवाहा, लक्ष्मी सिरोठिया, सीमा जैन, रीना राजपूत, रेखा जैन आदि ने हिस्सा लिया।
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- पर्यावरण संरक्षण को आगे आये बच्चे
ग्राम डुलावन में बच्चों ने गांव में ही अपने घरों व खेत में वृक्ष लगाकर स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया। इस दौरान जितेंद्र चंदेल, रितिक राजा चौहान, मोहित विश्वकर्मा आदि बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण हेतु अन्य बच्चों को भी प्रेरित किया और स्वंय भी पर्यावरण संरक्षण को संकल्पित हुए।
विश्व पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिवर्ष दुनिया भर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण से हमारे जीवन का अटूट संबंध है फिर भी हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की महती आवश्यकता है।
- कल्पना जैन, प्राचार्य सुधासागर इंटर कॉलेज
हम मिट्टी को भी पूरी तरह खो चुके हैं। इन सबके विकल्प विज्ञान को ये दिखाई दिए कि इनके खराब होते ही पानी के लिए बोतलबंद पानी व वाटर प्यूरीफायर आ गए। मिट्टी की गुणवत्ता खराब होनी शुरू हुई गई तो रासायनिक खाद आ गई। जब प्राणवायु संकट में पड़ गई तो एयर प्यूरीफायर हमने प्रकृति के उत्पादों के विकल्पों को बाजार में लाकर नए उद्योग तो खड़े कर दिए मगर प्रकृति के बड़े दुश्मन बन गए।
- बारबरा पी लाल, प्रधानाचार्य आरई मिशन जूनियर हाईस्कूल
इस लॉक डाउन के दौरान प्रकृति की सांस में प्रदूषण का जहर भी कम घुला। इन खबरों में से एक बात तो स्पष्ट है कि अगर हम शुरुआती दौर से ही प्रकृति को समझ पाते तो शायद आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। पिछले कुछ दशकों से नए-नए नामों के साथ प्राकृतिक विपदाएं और बीमारियां आयीं हैं।
- शर्मिला सक्सेना, प्रधानाचार्य रोटरी पब्लिक स्कूल
पर्यावरण का संरक्षण करना है तो हमें प्रकृति के अनुरूप चलना होगा। प्रकृति का संरक्षण करना होगा। वृक्षारोपण करना होगा। तब हमारा पर्यावरण संतुलित रहेगा। हमें शुद्ध ऑक्सीजन भी मिल सकेगी। वृक्ष धरा के उपहार हैं। आज पूरा संसार पर्यावरण के संरक्षण की ही बात कर रहा है। हमें पर्यावरण को बचाना है तो वृक्षारोपण करना होगा। जिससे हमें शुद्ध हवा एवं ऑक्सीजन मिल सके।
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- मधु साहू, प्रधानाचार्य, जयगुरुदेव प्ले स्कूल
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