संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जेल जाने वाला थाने में किशोरी से दुष्कर्म करने का आरोपी इंस्पेक्टर बैरक नंबर पांच में रखा गया है। जेल में पहली रात वह करवटें बदलता रहा।
वर्ष 2022 में थाना पाली प्रभारी निरीक्षक तिलकधारी सरोज पर शिकायत करने आई किशोरी के साथ थाने में ही दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद आरोपी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। 2 मार्च 2023 को उच्च न्यायालय प्रयागराज ने इंस्पेक्टर को जमानत दे दी थी। जेल से बाहर आने के बाद उसे सीतापुर ट्रेनिंग सेंटर में तैनाती दे दी गई थी। इस जमानत के खिलाफ पीड़िता ने एक स्वयं सेवी संस्था की मदद से सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने तीन मई को आरोपी इंस्पेक्टर तिलकधारी की उच्च न्यायालय प्रयागराज से मिली जमानत रद कर दी थी। इसके बाद अपर सत्र/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने गैर जमानती वारंट जारी किया था।
23 मई को आरोपी इंस्पेक्टर ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। यहां से उसे जेल भेज दिया गया था। उसे बैरक नंबर पांच में रखा गया है। पहली रात वह करवटें बदलता रहा, जबकि दूसरे दिन शुक्रवार को सामान्य नजर आया। बैरक के साथी बंदियों से बातचीत की और नित्य क्रिया कर भोजन-पानी किया। जेल प्रशासन द्वारा आरोपी इंस्पेक्टर पर नजर रखी जा रही है। जेल के अधिकारियों के अनुसार आरोपी इंस्पेक्टर आम बंदियों की तरह रखा गया है।