सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह ने गुरुवार को गोद लिए गांव पूरा विरधा, धमकना के अलावा ग्राम सभा खांदी और तेरई का भी औचक निरीक्षण किया। उन्होंने चारों गांवों में कुपोषित बच्चों के बारे में आशा से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने मेटरनिटी विंग का भी निरीक्षण किया और वहां कार्यरत स्टाफ को नियम से कार्य करने के निर्देश दिए।
सबसे पहले सीएमओ पूरा विरधा गए। वहां उन्हें 17 अति कुपोषित और 39 कुपोषित बच्चें मिलें। धमकना में 12 अति कुपोषित और 26 कुपोषित, खांदी में 20 अति कुपोषित और 43 कुपोषित बच्चे मिलें। इसके बाद वह प्रत्येक गांवों में एक कुपोषित बच्चे के परिवार में गए। जहां उन्होंने बच्चे के बारे में परिजनों से विस्तार से जानकारी ली। जिस पर उन्होंने बताया कि बच्चों को कुछ समय से पौष्टिक आहार नहीं दिया जा रहा है। वहीं, एक माह पहले बच्चों को जन्म देने वाली प्रसूता के यहां जाकर बच्चें के विकास सहित विभिन्न जानकारियां ली। इसके बाद उन्होंने पूराविरधा के स्वास्थ्य केंद्र और धमकना के उपकेंद्र का निरीक्षण किया। इसमें उन्होंने बताया कि पूराविरधा के स्वास्थ्य केंद्र जाने का मार्ग काफी दयनीय स्थिति में है, जिसके चलते मरीजों को भारी असुविधा होती है।
इसके बाद उन्होंने मैटरनिटी विंग का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां कार्यरत स्टाफ नर्सों की जमकर क्लास लेते हुए नियम से कार्य करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रसव में यदि पैसा वसूलने की फिर शिकायत आई और वह सत्य पाई गई तो दोषी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कैलाश बाबू से सीएचसी कैप्सन की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। इस मौके पर डॉ. सूरज, डॉ. अनुराग बजाज भी मौजूद रहें।
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धमकना के सब सेंटर से अतिक्रमण हटवाने के निर्देश
तालबेहट। जब मुख्य चिकित्साधिकारी से उनके गोद लिए गांव धमकना के स्वास्थ्य उप केंद्र पर एक दबंग द्वारा कब्जा करने की बात कही गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान से इस संबंध में बात हो गई है। शीघ्र ही उपकेंद्र से अतिक्रमण हट जाएगा।
एक और चिकित्सक की तैनाती की रखी मांग
तालबेहट। औचक निरीक्षण पर आए सीएमओ के समक्ष सीएचसी में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों ने सीएचसी में एक और चिकित्सक के तैनाती की मांग रखी। उन्होंने बताया कि सीएचसी में प्रति दिन लगभग 500 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इस समय मात्र तीन चिकित्सक ही ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं दे रहें है। ऐसी स्थिति में एक साथ इतने मरीजों का उपचार करने में चिकित्सक पूरा समय नहीं दे पाते हैं।