अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। किडनी और थैलेसीमिया के मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ने पर खुद इसकी व्यवस्था करनी पड़ सकती है। कारण, जिला अस्पताल स्थित रक्तकोष में मात्र 10 यूनिट रक्त बचा है, इसमें भी बी पॉजिटिव, ए व एबी निगेटिव ग्रुप के रक्त का स्टाक शून्य है। आपात स्थित में मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
करीब डेढ़ माह से शिविर न लगने के कारण रक्तकोष में खून का स्टॉक लगातार कम होता जा रहा है। अब तो स्थिति बेहद खराब है, क्योंकि 300 यूनिट की क्षमता के रक्तकोष (ब्लड बैंक) में मात्र 10 यूनिट रक्त ही शेष बचा है। वहीं, तीन समूहों के रक्त का स्टाक शून्य होने से डायलिसिस कराने वाले और थैलेसीमिया सहित अन्य मरीजों को खासी दिक्कत हो सकती है। विभागीय जानकारी के मुताबिक रक्तकोष में करीब 12 से 15 मरीज थैलीसीमिया के आते हैं। इन्हें प्रतिमाह लगभग 20 यूनिट रक्त देना होता है, वहीं डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों को भी 20 यूनिट दिया जाता है। इसके अलावा पांच यूनिट रक्त बेसहारा मरीजों के लिए जुटाना होता है, लेकिन प्रतिमाह 40 यूनिट के सापेक्ष मात्र 10 यूनिट ही स्टाक में है। रक्तकोष प्रभारी का कहना है कि स्टॉक बढ़ाने के लिए समाजसेवी संस्थाओं को रक्तदान शिविर लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही स्टॉक क्षमता बढ़ जाएगी।
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इन बीमारियों से ग्रसित मरीजों को दिया जाता है नि:शुल्क रक्त
रक्तकोष से जननी सुरक्षा योजना के मरीज, थैलीसीमिया, डायलिसिस, कैंसर आदि के मरीजों को नि:शुल्क रक्त दिया जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार लगभग 40 यूनिट रक्त बिना रक्तदान किए ही दिया जाता है।
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ये है रक्तकोष की स्थिति
ग्रुप यूनिट
ए पॉजिटिव - तीन
बी पॉजिटिव - शून्य
ओ पॉजिटिव - दो
एबी पॉजिटिव - दो
ए निगेटिव - शून्य
बी निगेटिव - दो
ओ निगेटिव - एक
एबी निगेटिव - शून्य
इस माह शिविर कम लगने से ब्लडबैंक में रक्त की कमी हो गई है। कई मरीजों को कार्ड पर रक्त दिया जाता है। अब संस्थाओं के सहयोग से शिविर लगाकर स्टॉक बढ़ाया जाएगा।-डॉ. एमएस राजपूत, नोडल अधिकारी, रक्तकोष