संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सिद्धपीठ श्रीलक्ष्मी नृसिंह मंदिर में चौथे दिन श्रीमद्भागवत कथा में प्रभु राम जन्म की कथा का वाचन किया गया। भए प्रकट कृपाला दीनदयाला... सुनकर भक्त भावविभोर हो उठे।
व्यास पीठ से धनवंतरि दास ने कहा कि सूर्य वंश में प्रकट हुए प्रभु श्रीराम मूर्तिमान धर्म के अवतार हैं। प्रभु श्रीराम ने मर्यादित चरित्र से हम सभी को मानवता का संदेश अपने जीवन चरित्र के माध्यम से दिया। प्रभु श्रीराम का आदर्श जीवन चरित्र युगों-युगों तक मानव को जीवन जीने की सद्प्रेरणा देता रहेगा। प्रभु नाम कल्याण का परम साधन है। प्रभु की भक्ति कामना रहित होकर करना चाहिए। भगवान शिव एवं माता सती के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि अहंकार पतन का प्रमुख कारण है। महाराजा दक्ष का अहंकार उनके पतन का कारण बना। इस अवसर पर महंत गंगादास महाराज, संजय ड्योडिया, धर्मेंद्र रावत, नरेश शेखावत, केएन शर्मा, विलास पटैरिया, भगवत नारायण वाजेपई, बृजेश चतुर्वेदी, सक्षम अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।