ललितपुर। कुत्ता, बिल्ली या बंदर काटे तो टीके जरूर लगवाएं। डॉक्टरों का कहना है कि एक बार रेबीज का संक्रमण होने पर किसी के भी बचने की संभावना शून्य हो जाती है और मौत भी बहुत भयावह होती है, इसलिए 24 घंटे के अंदर टीके जरूर लगवाएं।
कुत्तों के काटने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। प्रतिदिन 20 से 25 नई घटनाएं सामने आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक माह में 700 से 800 लोग एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. देशराज ने बताया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज समेत छह सीएचसी और 25 पीएचसी पर इसकी सुविधा है। उन्होंने बताया कि कुत्ते या अन्य जंगली जानवरों के काटने पर तत्काल घाव को पानी और साबुन से साफ करें। घाव को खुला छोड़ें, टांके या बैंडेज न लगाएं। तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर टीकाकरण कराएं।
डॉक्टर ने बताया कि त्वचा पर उक्त जानवरों के छूने या लार लगने की स्थिति में टीका लगवाने की आवश्यकता नहीं होती। वहीं, त्वचा पर दांत या नाखून से खरोच या लालिमा, जिसमें हल्का रक्तस्राव हो तो चार टीके लगवाएं, जो 24 घंटे के अंदर, फिर तीसरे दिन, 11वें दिन और 28वें दिन लगवाने होते हैं। जबकि ज्यादा घाव होने पर उक्त चार टीकों के साथ एंटीबॉडी के रूप में इम्यूनोग्लोबुलीन घाव के चारों तरफ मरीज के वजन के आधार पर लगाया जाता है।
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सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज के टीके निशुल्क उपलब्ध हैं। समय पर पहुंच कर टीकाकरण कराएं।-डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ