बृहस्पतिवार की रात डेढ़ बजे थाना जाखलौन के अंतर्गत ग्राम अमऊखेड़ा में खेत में बनी झोपड़ी में चूल्हे की आग भड़कने से मासूम भाई निकेत (2) और बहन कल्लो (13) की जलकर मौत हो गई। कल्लो की मौत भाई को बचाने के प्रयास में हुई। इससे पहले उसने शोर मचाकर अपनी मां और दो बहनों को झोपड़ी से बाहर निकाल दिया। इससे वे दोनों बच गईं। घटना की जानकारी होने पर इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया।
धौर्रा निवासी 40 वर्षीय सीमा पत्नी स्व. हरीशंकर सहरिया दो माह से पास के ही ग्राम अमऊखेड़ा में दूसरे के खेतों की रखवाली करती है। मेहनत मजदूरी से जो मिलता था उसी से वह अपने परिवार का भरण पोषण करती है। उसने खेत पर ही झोपड़ी बना रखी थी। यहां वह अपनी तीन पुत्रियों कल्लो (13), मोनिका (6), मंजू (4) और पुत्र निकेत (2) के साथ रहती थी।
उसकी सास और ननद का परिवार भी पास में ही दूसरे खेतों की रखवाली के लिए अलग-अलग झोपड़ी में बनाकर रहता है। सीमा ने बृहस्पतिवार की रात झोपड़ी में चूल्हे पर खाना बनाया। रोज की तरह चूल्हे की आग को ठंडा करने के लिए उसे राख से ढंक दिया। इसके बाद खाना खाकर सभी लोग सो गए। रात करीब डेढ़ बजे चूल्हे की आग अचानक से सुलग गई। चिंगारी से झोपड़ी में भी आग लग गई।
इसी दौरान बड़ी बेटी कल्लो की आंख खुल गई। उसने चिल्लाकर मां सीमा और दो बहनों मोनिका और मंजू को जगाया। तीनों को बाहर निकाला। इसके बाद रजाई में सो रहे छोटे भाई निकेत को भी उठाने का प्रयास किया, लेकिन इसी दौरान जलती हुई झोपड़ी उन दोनों भाई-बहन के ऊपर गिर पड़ी, जिससे दोनों की झोपड़ी में ही जलकर दर्दनाक मौत हो गई।
महिला और दोनों बच्चियों के चीखने की आवाज सुनकर पास में ही दूसरी झोपड़ी में सो रही उनकी दादी व ननद का परिवार दौड़कर मौके पर पहुंचा। दूर से पानी लाकर किसी तरह आग बुझाई। आग से झोपड़ी में रखा सामान भी जल गया। सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस, जाखलौन थाना पुलिस एवं सीओ सिटी केशवनाथ रात में ही मौके पर पहुंच गए। घटना की जानकारी लेकर शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सुबह होने पर एसडीएम सदर व नायब तहसीलदार ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया और पीड़ितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की बात कही।
ग्राम अमऊखेड़ा में दुखद घटना घटी है। जो भी सहायता राशि बनती है, उसके लिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जो भी मदद होगी की जाएगी।
गिरजेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक