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घर-घर कैसे पहुंचेगा ‘अमृत’ का जल

Tue, 06 Sep 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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water, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। अटल मिशन फॉर रिजूविनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना के तहत सभी घरों में मुफ्त नलों के संयोजन देने की कार्ययोजना सवालों के घेरे में फंस गई है। नगर में स्थित साढ़े तेईस हजार से अधिक मकानों में सिर्फ दस हजार में ही नलों के संयोजन हैं। जल निगम ने शहर में 2.17 करोड़ रुपए की लागत से 4,942 नलों के कनेक्शन देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। ऐसे में मुख्य सवाल है कि बाकी घरों में पानी कैसे पहुंचेगा। वहीं जल निगम शहर के शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है। 
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शहर में कई परिवार ऐसे हैं, जिनको स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित अमृत योजना में शहर के समस्त घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए नलों का कनेक्शन उपलब्ध कराया जाना है। जिन घरों व मुहल्लों में नल या पाइप लाइन नहीं है वहां इस योजना के तहत पाइप लाइन भी बिछवाई जानी है। इसके अलावा शहर की जर्जर हो चुकी पुरानी पाइप लाइनों को भी बदला जाना है। जल निगम ने इसके लिए 2.17 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना में नेहरू नगर क्षेत्र के दोनों वार्डों को शामिल नहीं किया गया है। 

नगर के समस्त 26 वार्डों में 23, 644 भवन स्वामी नगर पालिका में गृहकर अदा करते हैं। इनके सापेक्ष जल संस्थान 21 हजार भवन स्वामियों से जलकल टैक्स वसूलता है। बाकी 2644 भवन वर्ष 2009 के सर्वे के आधार पर 32 रुपये से कम गृहकर अदा करने वालों की सूची में शामिल होने के कारण जलकल के दायरे में नहीं आते हैं। वहीं जल संस्थान के माह अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार पूरे शहर में केवल 10,090 नल कनेक्शन हैं। यानी शहर नगर पालिका में वर्तमान में दर्ज 23,644 भवनों के सापेक्ष 43 प्रतिशत से भी कम कनेक्शन हैं।
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नगर पालिका व जल संस्थान विभाग के उक्त आंकड़ों ेको देखा जाए तो शहर के शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की कार्ययोजना केवल मजाक प्रतीक हो रही है।  जल निगम द्वारा अमृत योजना के तहत 4,942 कनेक्शन करने के बाद भी नेहरू नगर क्षेत्र को छोड़कर शहर के करीब साढ़े सात हजार भवन नल कनेक्शन से वंचित रह जाएंगे। इससे यह साफ होता है कि जल निगम ने सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को बिना कोई सर्वे किए ही तैयार कर ली है।

गौरतलब है कि नगर पालिका द्वारा स्वकर प्रणाली के लिए कराए गए सर्वे में शहर में भवनों की संख्या 34 हजार से अधिक पाई गई है। इन नवीन भवनों का नगर पालिका में कोई रिकार्ड दर्ज नहीं है, लेकिन यहां रहने वाले हजारों भवन स्वामियों को भी पेयजल के लिए नलों की सुविधा जल निगम कैसे उपलब्ध उपलब्ध कराएगा, यह एक चुनौती है।

जल निगम ने निकाला टेंडर
अमृत योजना के तहत शहर में 4,942 नल कनेक्शन कराने के लिए जल निगम ने पिछले सप्ताह टेंडर भी निकाल दिया है। जल निगम ने उक्त नलों के कनेक्शन के लिए 2.17 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की थी, इस पर भारत सरकार ने अन्य मदों का व्यय जोड़कर कुल 2.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है। 39.61 लाख रुपये की प्रथम किस्त अवमुक्त कराने की भी स्वीकृति दे दी गई है। इस प्रथम किस्त में 21.44 लाख केंद्रांश का, 12.86 लाख राज्यांश व 5.31 निकायांश का होगा। 

अवैध कनेक्शन वालों की है मौज
वर्तमान में शहर में करीब 43 प्रतिशत भवन ऐसे हैं, जहां पर जल संस्थान की ओर से नलों का कनेक्शन किया गया है। इसके अलावा शहर में ऐसे सैकड़ों भवन स्वामी मिलेेंगे जिन्होंने अवैध तरीके से नलों के कनेक्शन करा लिए हैं, जिनका विभाग में कोई रिकार्ड दर्ज नहीं है। यह लोग सरकार को बिना कोई टैक्स दिए स्वच्छ पेयजल का मुफ्त में उपयोग कर रहे हैं। 
नेहरू नगर के लिए 26 करोड़ की है योजना 
अमृत योजना के तहत जल निगम ने नेहरू नगर क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब 26 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। नेहरू नगर में अलग से प्लांट की स्थापना कराई जाएगी।  इसके लिए विभाग ने नेहरू नगर में ही जमीन चिह्नित कर ली है। इस कार्ययोजना को शासन से स्वीकृति भी मिल गई है। इसको धरातल पर लाने के लिए विभाग को केवल बजट का इंतजार है। इसके बाद वर्षों से चली आ रही पेयजल की गंभीर समस्या से स्थानीय हजारों लोगों को राहत मिल सकेगी।

विभाग द्वारा इस योजना के लिए कोई सर्वे नहीं कराया गया है। जल संस्थान व जल निगम से मिले आंकड़ों के आधार पर ही शहर में 4,942 नलों के कनेक्शन कराने की कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं शासन के निर्देशन पर ही उक्त कार्य की टेंडर प्रक्रिया की गई है, शासन से बजट आते ही नल कनेक्शन का कार्य शुुरु करवा दिया जाएगा।
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एस.एन. कटियार
अधिशासी अभियंता, जल निगम निर्माण इकाई
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