ललितपुर। लॉकडाउन में रियायत के बाद भी निजी निर्माण कार्य एवं अन्य व्यवसाय गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। इसका खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। इन दिनों श्रमिक अड्डा पर भी श्रमिकों को मायूसी हाथ लग रही है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया है। इस कारण व्यवसायिक गतिविधियां बंद चल रही हैं। आवश्यक सेवाओं में किराना, मेडिकल, दूध, कृषि बाजार, निजी निर्माण कार्य एवं उद्यम कार्य के लिए अनुमति दी गई है। इसके बाद भी रोजगार को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। इस समय शहर में बना श्रमिक अड्डा भी श्रमिकों के लिए रोजगार का साधन नहीं रहा। इसका सीधा असर श्रमिकों की जेब पर पड़ रहा है, उन्हें मौजूदा समय में तंगहाली में जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।
बसों से उतरने वाले सामान को हाथ ठेला से एक जगह-दूसरी जगह पहुंचाते थे। वर्तमान में बसों का संचालन बंद है, इस कारण पल्लेदारी का काम ठप पड़ गया है। वर्तमान में श्रमिक अड्डा पर काम की तलाश में आ रहे हैं, लेकिन यहां भी रोजगार नहीं मिल रहा है।
- संतोष, घुसयाना
श्रमिक अड्डा पर तीन दिन से काम की तलाश में आ रहे हैं, लेकिन हर दिन मायूसी ही हाथ लग रही है। बाजार में भी अन्य कोई काम नहीं है। घर बैठे दिन नहीं कटता है। जेब खाली होने पर घर के चूल्हा जलने की चिंता सताती रहती है।
- संजू, घुसयाना
दो दिन से कोई भी काम नहीं मिला है। सुबह ग्यारह बजे तक श्रमिक अड्डा पर रोजगार मिलने का इंतजार करते रहते हैं। रोजगार नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा सरकारी मदद भी नहीं मिल पा रही है।
- अर्जुन, रामनगर
बेलदारी का काम सालों से करते आ रहे हैं, लेकिन जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से काम मिलना बंद हो गया है। सरकार राशन में मुफ्त चावल मुहैया करा रही है, लेकिन, तेल, मसाले का इंतजाम कैसे होगा? इसकी चिंता सताती रहती है।
- शेख इकरार, गोविंद नगर
डेढ़ महीने से हाथ पे हाथ रखे बैठे हैं। रोजगार की हालत इतनी खराब है कि कहीं ढूंढे काम नहीं मिल रहा है। पहले दो सौ से ढाई सौ रुपये दिन मजदूरी मिलती थी, अब वह भी नसीब नहीं हो रही है।
- बबलू
प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों को राशन एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सभी मजदूरों का ध्यान रखा जा रहा है।
- मनोहरलाल पंथ
श्रम एवं सेवायोजन राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन