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आसान नहीं दलालों के ‘जाल’ से छुटकारा पाना

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प्रशासन - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। जिला महिला अस्पताल में प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को भय दिखाकर दलाल उन्हें निजी नर्सिंग होम में ले जाते हैं। यह सब इतने सुनियोजित तरीके से होता है कि मरीज भांप नहीं पाता कि इसमें कर्मचारियों की भी संलिप्तता है। वरना, ऐसी क्या वजह है कि गर्भवती महिला जब जिला अस्पताल में प्रसव कराने आई है तो वह सरकारी अस्पताल छोड़ निजी नर्सिंग होम में क्यों चली जाती है? दलालों का जाल इतना गहरा है कि ओपीडी, ब्लड बैंक, पैथालॉजी से लेकर निजी नर्सिंग होम तक इसकी गिरफ्त में हैं। एक गर्भवती महिला को नर्सिंग होम में शिफ्ट कराने पर कुल सौदे का 30 प्रतिशत फिक्स रहता है, जो दलाल को मिलता है।
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महिला अस्पताल में दलालों का जाल अंदर तक जकड़ा हुआ है। यहां पर कोई एक दलाल नहीं है, बल्कि कई लोग इसमें लिप्त हैं, जो बारी-बारी से अपने टर्न या ग्राहक के हिसाब से सामने आते हैं। इसमें कुछ लोग तो अस्पताल में ही बैठे रहते हैं और मरीज समझता है कि यहां के कर्मचारी हैं। उनका विभागीय लोगों के साथ बोलचाल का तरीका बहुत याराना होता है। दलालों के इशारे पर ही कर्मचारी मरीज को मौत का भय दिखाता है। मरीज को ऑपरेशन से मौत होने का भय लगता है और वह आसानी से गिरफ्त में फंस जाता है। दलाल दिन भर जिला संयुक्त चिकित्सालय व जिला महिला अस्पताल के पास घूमते रहते हैं और भर्ती मरीजों को मौत का भय दिखाकर अन्य अस्पताल में बेहतर उपचार का झांसा देते हैं। मौत के भय से मरीज जान बचाने के लिए उनकी बातों में आ जाता है।
यही हाल चिकित्सकों की ओपीडी के बाहर का है, यहां मरीज सस्ते में मर्ज का इलाज कराने आते हैं। आसपास घूम रहे दलाल मरीजों से मर्ज के बारे में जानकारी करते हैं। मर्ज जान लेने के बाद उससे पता पूछते हैं। इसी दौरान अपनत्व दिखाकर मर्ज का अच्छा इलाज कराने की सलाह देते हैं और मरीज को बातों में फंसा लेते हैं। इसके बाद निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम पर ले जाते हैं। जहां उपचार के नाम पर मोटी रकम में से 30 प्रतिशत चिकित्सक से लेकर निकल लेते हैं। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि महिला अस्पताल में चिकित्सकों व स्टाफ नर्सों पर नजर रखी जा रही है। दलालों को चिह्नित करने के लिए गोपनीय जांच भी चल रही है। सीसीटीवी कैमरों में ऐसे लोग नजर जरूर आएंगे, जो विभागीय कर्मचारी नहीं होने के बाद भी चार- चार घंटे नियमित अस्पताल में बैठते हैं।  
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ऑटो चालकों को मिलते हैं पांच सौ रुपये
दलालों के साथ कुछ ऑटो चालकों की संलिप्तता भी है। मरीज को निजी नर्सिंग होम ले जाने पर पांच सौ रुपये मिलते हैं। मरीज से किराया मिलता है, वह अलग है।

डिजीटल एक्सरे के  नाम पर भी सक्रिय
जिला अस्पताल में स्थापित ट्रॉमा सेंटर में भी दलाल सक्रिय हैं। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को चिकित्सक एक्सरे की सलाह देते हैं। अस्पताल में डिजीटल एक्सरे नहीं होने के कारण चिकित्सक बाहर से एक्सरे कराने की सलाह देते हैं। यहां दलाल चिकित्सकों की ओपीडी में मंडराते हैं, जो मरीजों को एक्सरे सेंटर पर ले जाकर मनमाने पैसे वसूलते हैं। इतना ही नहीं यह दलाल आवास पर उपचार कराने की सलाह देते हैं। महिला अस्पताल में शहर के नेहरू नगर, स्टेशन के पास, सरायपुरा के अलावा ग्राम पटऊवा, सीरौन कलां, चढ़रऊ, पाली समेत अन्य गांवों के पंद्रह से बीस लोग सक्रिय हैं।   

जिला अस्पताल स्थित चिकित्सकों पर ओपीडी के आसपास नजर रखी जाएगी। यहां लगातार कई दिनों से आने- जाने वाले लोगों से पूछताछ की जाएगी। साथ ही ट्रामा सेंटर का भी निरीक्षण किया जाएगा। संदिग्ध पकड़े जाने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

जिला अस्पताल पुरुष, महिला व ब्लड बैंक में दलालों के घूमने का मामला सामने आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही दलालों को चिह्नित करने के लिए गोपनीय जांच कराई जाएगी। दोषियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
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- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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