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होम्योपैथी अस्पताल हैं, डॉक्टर नहीं

Tue, 25 Oct 2016 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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hospital, lalitpur news - फोटो : demo
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ललितपुर। राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालयों में स्टाफ की भारी कमी है। चौबीस अस्पताल के सापेक्ष मात्र छह चिकित्सक हैं। इस कारण लोगों को इन अस्पतालों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्टाफ केवल इन्हें खोलने व बंद करने का काम करता है। पांच अस्पताल तो ऐसे हैं जो पूरी तरह से बंद हैं।      
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होम्योपैथी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है, लेकिन जनपद में शासन द्वारा पर्याप्त स्टाफ व सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने पर जिला मुख्यालय को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में होम्योपैथिक सेवाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। जिला मुख्यालय पर संचालित जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में भी स्टाफ की भारी कमी है। यहां पर केवल एक ही चिकित्सक डा.विवेक सक्सेना तैनात हैं। अन्य स्टाफ में केवल एक चौकीदार ही तैनात है।
चिकित्सक विवेक सक्सेना को ही जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी का पदभार भी सौंपा गया है। यहां दिन भर में अस्सी से सौ मरीजों का आना होता है। इन मरीजों में ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की संख्या काफी होती है।      
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यहां हैं अस्पताल
जनपद के ग्राम खितवांस, समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, भीकमपुर, सोजना, भौड़ी, वंट, बालाबेहट, थनवारा, बुढ़वार, जखौरा, ननौरा, बिजरौठा, तालबेहट, भुचेरा, गेवरा, पूराबिरधा, गदयाना, बुरागांव, भावनी, देवरान व कारीटोरन में होम्योपैथी अस्पताल हैं, लेकिन इन चिकित्सालयों का संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक चिकित्सालय पर एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय और स्वीपर कम चौकीदार की तैनाती अनिवार्य है। लेकिन जिला मुख्यालय, ग्राम बालाबेहट, बुढ़वार, तालबेहट, गेवरा व गदयाना चिकित्सालय में डाक्टरों की तैनाती है। वहीं मात्र 10 फार्मासिस्टों की ही तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रत्येक चिकित्सालय केंद्र पर चतुर्थ श्रेणी के दो कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। इस हिसाब से 48 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन  केवल 14 कर्मचारी ही तैनात हैं। वहीं करीब आधा दर्जन अस्पताल ऐसी भी हैं जहां केवल चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की ही तैनाती है।      

किराए के कमरों में खुली हैं अस्पतालें      
जनपद में कई अस्पताल किराए के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। ग्राम समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, सौजना, भौड़ी, बुढ़वार, ननौरा, भुचेरा, गदयाना के अस्पताल किराए के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। शासन वर्षों से इन अस्पतालों को खुद का भवन उपलब्ध नहीं करा पाया है। वहीं शासकीय भवनों की स्थिति भी बदतर हो चुकी है। जिला मुख्यालय में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल एनआरएचएम के भवन में अस्थाई तौर पर संचालित किया जा रहा है।      

शासन से करेंगे बजट की मांग      
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा.विवेक सक्सेना बताते हैं कि विभिन्न कारणों के चलते विगत वर्षों से जनपद की होम्योपैथिक की सेवाएं ठप पड़ी हुुई हैं, लेकिन उन्हें पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन से मिलकर पूरी कोशिश की जा रही है। जिला मुख्यालय पर उच्च स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण इलाकों में तैनात स्टाफ से अस्थाई तौर पर सहायता ली जा रही है। वहीं स्टाफ की मांग को लेकर शासन को पत्र भेजकर संविदा कर्मियों की मांग की जाएगी। जनपद को शासन द्वारा पिछले वर्षों तक मात्र तीन लाख रुपए वार्षिक दिया जाता था, इस न्यूनतम बजट के उचित सेवाएं उपलब्ध कराना आसान नहीं है। इस बार उनके द्वारा शासन से विशेष बजट की मांग के लिए पत्र भेजा जा रहा है, इस विशेष बजट से अस्पतालों के फर्नीचर व भवनों की मरम्मत की जाएगी।
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