ललितपुर में जिले में अन्ना जानवरों के विचरण की समस्या हल नहीं हो पा रही है। अन्ना जानवर झांसी-सागर नेशनल हाईवे पर काल बनकर घूम रहे हैं। सड़कों पर बैठने व घूमने वे आए दिन जगह-जगह वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है तो वहीं, पशुओं की भी मौत हो रही है। इससे जगह-जगह दुर्गंध उठ रही है। स्थिति यह है कि दिन हो या रात वाहन चलाना खतरे से खाली नहीं है। यह स्थिति हाईवे पर ही नहीं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बनी हुई है।
शासन ने गोवंश के लिए सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। इनमें 17 गोशालाएं व 22 कांजीहाऊस संचालित हैं। इन सभी में लगभग 31 हजार जानवर संरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा 82 सौ जानवरों को पशुपालक संरक्षित किए हैं। इस तरह 39 हजार दो सौ जानवर संरक्षित हैं। इन पर पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी होने के साथ ही गोवंश को तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं।
इसके बाद भी गोवंश के विचरण की समस्या हल नहीं हो सकी है। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इन जानवरों से किसान परेशान हैं और फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों में डटे हैं। वहीं रात्रि होते ही अन्ना जानवरों को गांव से बाहर कर दिया जाता है। दूसरे गांव के लोग भी वहां से भगाकर दूसरे गांव में कर देते हैं।
अब यह आवारा पशु दिन रात नेशनल हाईवे पर जुट रहे हैं। सड़कों पर एक साथ झुंड में घूमने से वाहनों का निकलना मुश्किल हो रहा है। कई बार तो जाम जैसे हालात भी बन जाते हैं। ऐसे में राहगीरों को अपने वाहन निकालने में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।हालात यह हैं कि यह जानवर कभी डिवाइडर पर विचरण करते हैं। इनमें लगे पौधों से नजर नहीं आते हैं।
सड़क पर इन अन्ना जानवारों के अचानक आने पर वाहन चालक अनियंत्रित होकर टकरा कर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। कई चालक काल के गाल में समा चुके हैं। साथ ही पशुओं की मौत भी हो रही है। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क व गलियों का भी है।
जिले में गोशालाओं में 31 हजार जानवर संरक्षित हैं। इसके अलावा 82 सौ जानवरों के पालन पोषण पर लोगों को प्रति जानवर नौ सौ रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। लगभग चार हजार जानवर विचरण कर रहे हैं, जिनके लिए गोशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। जिसके बाद इन जानवरों को संरक्षित किया जा रहा है।- एसके पांडेय, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग