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जेल भू अधिग्रहण में वर्ग तीन के किसानों को मिलेगा भूमिधरी के बराबर मुआवजा

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ललितपुर। जिले में बन रही हाईटेक जेल के भूमि अधिग्रहण में आड़े आ रही सात एकड़ जमीन के मुआवजे का मामला सुलझ रहा है। इन जमीनों पर काबिज किसानों को अन्य किसानों के बराबर ही मुआवजा दिया जाएगा। डीएम ने संबंध में आदेश जारी कर जेल प्रशासन से धनराशि मांगी है।
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जिले से करीब सात से आठ किलोमीटर की दूर गांव बुढवार में प्रदेश की हाईटेक जेल बनाई जा रही है। 130 एकड़ भूमि पर बन रही जेल के लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है। भूमि अधिग्रहण में करीब सात एकड़ ऐसी जमीन आई, जो राजस्व अभिलेखों में वर्ग तीन में दर्ज थी। इस भूमि पर काबिज किसानों को मुआवजा देने को लेकर पेच फंस रहा था। मामला जिलाधिकारी आलोक सिंह के समक्ष आया। तब जिलाधिकारी ने इस जमीन को भूमिधरी में दर्ज कर मुआवजा उसी के बराबर देने का आदेश जारी कर दिया है। जिस कारण अब इन किसानों को भी अन्य किसानों के बराबर ही मुआवजा मिलेगा।
साढ़े चार हजार बंदियों की क्षमता की होगी हाईटेक जेल
ग्राम बुढवार में हाईटेक जेल बनाए जाने का प्रस्ताव करीब छह वर्ष पूर्व शासन को भेजा गया था। इस जेल में करीब साढे़ चार हजार बंदियों को रखने की क्षमता होगी। कुछ माह पूर्व कारागार एवं होमगार्ड राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति ने यहां भूमि पूजन किया था।
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जिला कारागार को बनाया जाएगा नारी बंदी गृह
जिला कारागार में करीब 180 बंदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन वर्तमान में यहां क्षमता से काफी अधिक बंदी मौजूद हैं। बुढवार में हाइटेक जेल बन जाने के बाद जिला कारागार को नारी बंदी गृह बनाने का प्रस्ताव शासन को प्रशासन को भेजा हुआ है। हालांकि अभी तक शासन ने इस प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया है।
जेल के लिए जो करीब 130 एकड़ भूमि अधिगृहित की जानी थी। उसमें कुछ जमीन वर्ग-तीन की थी। इसके मुआवजा के लिए किसान परेशान हो रहे थे। शासनादेश अनुसार उन्हें भूमिधरी कृषकों के समान मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
आलोक सिंह, जिलाधिकारी
यह होती है वर्ग तीन की भूमि
बहुत सी जमीनें ऐसी होती हैं, जिन पर किसान पीढ़ी दर पीढ़ी खेती करता रहता है, लेकिन उसे बेचने का हक नहीं होता है। ऐसी जमीनों को वर्ग-तीन की जमीन कहा जाता है। इन जमीनों के काश्तकारों का न ही किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाता है और न ही अन्य सुविधाएं। सरकारी योजनाओं में भूमि अधिग्रहण के दौरान ऐसी जमीन का अधिग्रहण हो जाता है। लेकिन भूमिधर के बराबर मुआवजा नहीं मिलता। लेकिन कुछ वर्ष पूर्व शासन ने ऐसी जमीनों को वर्ग-दो में दर्ज कर भूमिधर के बराबर करने का कानून पास किया था।
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