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देवरान में उल्टी-दस्त का कहर22

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देवरान गांव में उल्टी-दस्त का कहर
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पुलवारा/ देवरान। ब्लॉक बार के ग्राम देवरान की सहरिया बस्ती के लोग उल्टी- दस्त की चपेट में हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर लोगों की जांच कर उपचार किया। इस दौरान 140 लोगों की जांच कर उन्हें दवाइयां दी गई। कितने दुर्भाग्य की बात है कि पांच साल पहले भी इसी बस्ती में आधा दर्जन बच्चों की उल्टी- दस्त से मौत हो गई थी। लेकिन, उस घटना से आज तक किसी ने सबक नहीं लिया।
गांव की सहरिया बस्त्ती में दूषित पानी पीने से लोग उल्टी-दस्त का शिकार हो रहे हैं। कई लोग सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपना उपचार करा चुके हैं। बीमारी से सहरिया बस्ती के दो बच्चों की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली तो मंगलवार को विभाग की टीम ने गांव में जाकर जांच व उपचार किया।
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गांव में बीमारी फैलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रताप सिंह, नोडल अधिकारी डॉ.राजेश भारती के अलावा बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ.चतुर्भुज राजपूत अपनी टीम के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने उल्टी-दस्त के रोगियों की जांच की। 140 लोगों की जांच कर दवाओं का वितरण किया। गांव में जांच कर उन्होंने लोगों को स्वच्छ पानी का उपयोग करने की सलाह दी ।
सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि यह बीमारी दूषित पानी एवं खाद्य पदार्थ के कारण होती है। सहरिया बस्ती के लोग जिस हैंडपंप का पानी उपयोग करते हैं, उसके समीप अत्यधिक गंदगी व्याप्त है। बरसात के समय में प्राकृतिक जलस्रोतों से दूषित पानी आ जाता है। उन्होंने पेयजल के स्रोतों के साथ ही गंदगी वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर डालने के निर्देश दिए है।
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स्वच्छ भारत मिशन बना मजाक
ग्राम देवरान की सहरिया बस्ती में स्वच्छ भारत मिशन का मजाक बना हुआ है। जहां नजर दौड़ाओ गंदगी नजर आती है। गांव के लोगों के अनुसार सहरिया बस्ती में कभी सफाई कर्मचारी नहीं आता है, जिससे जगह- जगह गंदगी व्याप्त है। ऊपर से बरसात के मौसम में पानी जमा हो जाने के कारण संपूर्ण बस्ती में दुर्गंध आती है।
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हैंडपंप से निकल रहा दूषित पानी
गांव के लोगों के अनुसार की सहरिया बस्ती में लगे हैंडपंप का पानी सभी लोग पीने में उपयोग करते हैं। इसी हैंडपंप के पास में बरसात का पानी भारी मात्रा में इकट्ठा है। इसकी कहीं से निकासी नहीं है। इस कारण मच्छर पनप रहे हैं। दूषित पानी हैंडपंप में भी पहुंच जाता है, उसी पानी को लोग पी रहे हैं, जिससे बीमार हो रहे हैं। हालांकि, सीएमओ ने हैंडपंप को तत्काल हटाने की बात कही, ताकि बीमारी से बचा जा सके। सहरिया समाज के लोगों ने कहा कि उनको पीने के पानी के लिए यही एकमात्र हैंडपंप का सहारा है। यदि इसे हटा दिया गया तो दिक्कत हो जाएगी।
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पांच साल पहले आधा दर्जन बच्चों की हुई थी मौत
गांव वालों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले भी गांव में इसी तरह उल्टी- दस्त की बीमारी फैल गई थी। इससे गांव में आधा दर्जन बच्चों की मौत हो गई थी। उस समय भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इसी हैंडपंप से निकलने वाले दूषित पानी को मौत की मुख्य वजह बताया था। लेकिन, जिम्मेदार लोगों ने कोई सबक नहीं सीखा और फिर दो बच्चों की मौत हो गई।
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आनन-फानन में की गई गांव में सफाई
गांव में उल्टी- दस्त से दो बच्चों की मौत की सूचना मिलने पर जिम्मेदार लोगों की गहरी नींद टूटी और आनन-फानन में गांव में सफाई के लिए एक दर्जन सफाई कर्मचारियों को बुलवाया गया। बड़ा सवाल यह है कि गांव में इससे पहले सफाई क्यों नहीं कराई जा रही थी।
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गांव में बीमार व्यक्तियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम डेरा डाले हुए है, यहां होम्योपैथिक चिकित्सालय में लोगों का परीक्षण कर उनका उपचार किया जा रहा है। सहरिया बस्ती में लोगों को दवाएं वितरित की गई है। लोगों को स्वच्छ पेयजल उपयोग करने की सलाह दी गई है।
- डॉ.चतुर्भुज राजपूत, अधीक्षक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार
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