टैक्सी चालकों की करीब पांच दिन से चल रही हड़ताल में अभिभावक बुरी तरह पिस गए हैं। चालकों द्वारा बच्चों को स्कूल नहीं छोड़ने की वजह से यह जिम्मा अभिभावकों को खुद उठाना पड़ रहा है।
शहर में जूनियर स्तर तक की शिक्षा प्रदान करने के लिए करीब 75 हिंदी और 32 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित हैं। इनमें से चंद स्कूल ही ऐसे हैं, जिनके पास खुद के वाहन हैं। वरना, अधिकांश स्कूलों की परिवहन व्यवस्था किराए की टैक्सियों पर टिकी हैं। जब चालक हड़ताल कर देते हैं तब इसका खामियाजा अभिभावकों को परेशान होकर भुगतना पड़ता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। बीते दिनों परिवहन विभाग ने नियम विपरीत टैक्सी दौड़ा रहे चालकों के खिलाफ कार्रवाई की तो उनमें नाराजगी दौड़ गई और उन्होंने स्कूली बच्चों को वाहन में बैठाना बंद कर दिया। जिससे अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल ले जाने व वापस घर लाने की जिम्मेदारी आ गई।
जो अभिभावक स्वयं का कारोबार करते हैं, उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हो रही है लेकिन इसमें सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी पिस गए हैं। वह स्कूल समय में अपना कार्यालय नहीं छोड़ पा रहे हैं, ऐसे में उन्हें बच्चों को स्कूल लाना और वापस घर छोड़ना चुनौती बन गया है। इस मामले में टैक्सी चालकों ने परिवहन विभाग को झुकाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें हर जगह से मायूसी हाथ लगी है। जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित जिला प्रशासन ने किसी प्रकार का आश्वासन देने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि चालकों को परिवहन नियमों का पालन तो करना ही पड़ेगा।
अब टैक्सी चालकों को वापस काम पर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं रहा है। वहीं, अभिभावक चालकों की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। हड़ताल लंबी चलती देख अभिभावकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। सोमवार को हड़ताल की सही तस्वीर साफ होने की संभावना है।
ये हैं मानक
स्कूल टैक्सी में अधिकतम छह बच्चों को बैठाया जा सकता है। चालक के पास स्कूल मैनेजमेंट का अधिकृत संबद्ध पत्र होना आवश्यक है। टैक्सी में बाई ओर गेट पर जाली अवश्य होना चाहिए। इसके अलावा टैक्सी पीले रंग में हो। यदि चालक इन मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे स्कूल टैक्सी का परमिट नहीं दिया जाता है।
निर्धारित मानकों को पूरा करें चालक
टैक्सी चालक यदि निर्धारित मानक पूरा करते हैं तो उन्हें कतई परेशान नहीं किया जाएगा। जो टैक्सी मानक के विपरीत संचालित होती पाई जा रही हैं, उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई है।
सतेंद्र कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
कहीं नहीं है हड़ताल
टैक्सी चालकों की ओर से हड़ताल नहीं है। वह बच्चों को स्कूल ले जा सकते हैं और घर वापस छोड़ सकते हैं।
गौतम रानू यादव, अध्यक्ष, टैक्सी यूनियन
विडंबना
शहर में दो दर्जन से ज्यादा टैक्सी स्कूल के बच्चों को लाने व छोड़ने में लगी हुई हैं। लेकिन शायद ही कोई टैक्सी परिवहन विभाग के मानकों को पूरा करती है। शायद यही वजह है कि किसी के पास स्कूल के बच्चों को लाने, छोड़ने का परमिट नहीं है।
स्कूल प्रबंधन चलाए बस
टैक्सी चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए स्कूल प्रबंधन अपनी बस चलाए। यदि प्रबंध तंत्र मजबूत नहीं है तो वह पीपीपी मॉडल पर बस की व्यवस्था करे, जिससे अभिभावकों को आए दिन होने वाली हड़तालों से छुटकारा मिल सके।
हेमंत तिवारी, अभिभावक