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Lalitpur News: पुरातत्व संग्रहालय का हाल, 137 प्राचीन मूर्तियों पर जमी धूल, लगे मकड़ी के जाल

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ललितपुर। सरकार पुरातत्व संपदा को सहेजने के लिए लगातार कवायद कर रही है, लेकिन जिले में संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन मूर्तियों का हाल बदहाल है। पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित 137 प्राचीन मूर्तियां धूल खा रही हैं। सफाई नहीं होने के चलते मूर्तियों पर धूल जम गई है। वहीं संग्रहालय में मकड़ी के जाले और मूर्ति के प्लेटफार्म पर गंदगी है।
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नेहरू नगर में करीब 14 वर्ष पूर्व पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण करीब 20 लाख रुपये की लागत से किया गया था। संग्रहालय में जनपद के विभिन्न स्थानों से खोदाई से प्राप्त मूर्तियों को संरक्षित किया गया है। शुरुआत में तो संग्रहालय में मूर्तियों को संरक्षित करके उनके नाम व उन मूर्तियों निर्माण की सदी की पट्टिका लगाई गई थी। लेकिन समय बीतने के साथ पट्टिका गायब हो गई और संरक्षण की कवायद दम तोड़ने लगी। यहां न तो साफ-सफाई नियमित होती है और न ही रंगाई पुताई एवं मरम्मत का काम समय से होता है। जिसके चलते इस संग्रहालय की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कई जगह दीवारों में दरार आ गई है। मूर्तियों और मूर्तियां रखने के लिए बने प्लेटफार्म पर धूल जमा हो गई है। जगह-जगह मकड़ी के जाले हैं। शौचालय का टैंक टूटा पड़ा है और सीट में बजरी भरी हुई है। वॉशबेसिन का पॉट टूटा पड़ा है। हालांकि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संग्रहालय में महीने में एक या दो बार सफाई कराई जाती है।
यह मूर्तियां हैं संरक्षित
संग्रहालय में 12वीं सदी का धौरीसागर गांव से मिला वास्तुखंड, छठवीं सदी की कुचदौं से प्राप्त चैत्य गवाक्ष युक्त रथिका में यम, नौंवी सदी की ग्राम कुचदौं से मिली शुकनास की मूर्ति, कुचदौं से ही मिली दसवीं सदी की लेटे हुए विष्णु की मूर्ति, दसवीं सदी की रथिका में कुबेर की मूर्ति, दसवीं सदी की ही कुचदौं से मिली विष्णु प्रतिमा का ऊर्ध्व भग्न भाग, नौंवी सदी की माहेश्वरी प्रतिमा का अधोभाग, नौंवी सदी की यमी की प्रतिमा, नौवीं सदी की वैष्णवी मूर्ति, बारहवीं सदी की भैरव प्रतिमा, ग्राम धौरीसागर से मिली ग्यारहवीं सदी की सप्तमातृका पट्ट की प्रतिमाओं समेत करीब 134 मूर्तियों को संरक्षित किया गया है।
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पुरातत्व धरोहरों को सहेजने के लिए नेहरू नगर में पुरातत्व संग्रहालय तो बना है, लेकिन यहां व्यवस्थाएं नहीं होने से लोग काफी कम संख्या में आते हैं। अंदर मूर्तियां सिर्फ सुरक्षित की गई हैं, सफाई नहीं होती है। - सचिन
पुरातत्व संग्रहालय पर शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन मूर्तियों का रखरखाव ही ठीक से नहीं किया जा रहा है और न ही यहां सुविधाएं हैं, जिससे यह सिर्फ बाहर से देखने की इमारत मात्र लगती है।- आशीष जाटव
शासन, प्रशासन द्वारा लाखों रुपये पुरातत्व धरोहरों को सहेजने के लिए खर्च किए जाते हैं, लेकिन यहां संरक्षित की गई छठवीं से नौंवी सदी की मूूर्तियों की बेकदरी हो रही है। यहां शौचालय तक का इंतजाम नहीं है और न ही संग्रहालय में बिजली व्यवस्था ही की गई। - विजय सिद्धार्थ
पुरातत्व संग्रहालय में बेशकीमती छठवीं सदी की प्राचीन मूूर्तियों का संरक्षण किया गया है, लेकिन यहां अव्यवस्थाओं के चलते इन मूर्तियों एवं उनके इतिहास की सही जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। - हरदयाल लोधी
पुरातत्व संग्रहालय में कर्मचारियों की कमी होने के चलते सारी व्यवस्थाएं समय से नहीं हो पा रही हैं। कर्मचारियों के लिए शासन स्तर से प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही संविदा कर्मचारी मिल सकते हैं। कुछ समय पूर्व ही यहां पेवरब्रिक्स व कुर्सियां लगवाई गई हैं।
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-मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।
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