ललितपुर। पुरानी प्रणाली की आयल सर्किट ब्रेकर (ओसीबी) मशीनें हटाकर नई प्रणाली की वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (वीसीबी) मशीनें स्थापित करने के कारण आधे शहर समेत औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा, देवगढ़ व राजघाट फीडर के सात दर्जन गांव की बिजली आपूर्ति दिन भर ठप रही। इससे तपन भरी गर्मी में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।
गल्ला मंडी स्थित 66 केवी सब स्टेशन में स्थापित फीडर नंबर एक, तीन, चंदेरा, राजघाट, देवगढ़ फीडरों के माध्यम से शहर समेत 84 गांव को बिजली आपूर्ति प्रदान की जाती है। यहां दशकों पूर्व से स्थापित ओसीबी मशीनों की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। इन मशीनों का ट्रिपिंग सिस्टम खराब होने से हाइटेंशन लाईनों में फाल्ट के कारण फीडरों की ओसीबी मशीनें कई बार ट्रिप नहीं करती थीं, जिससे यहां तैनात विद्युत कर्मी की जान को भी खतरा बना रहता था।
कई बार स्थिति से निपटने के लिए नई वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीनों के लिए स्टीमेट बनाया गया, आला अधिकारियों के पास भेजा गया। स्टीमेट पास भी हो गया, यहां तक कि करीब आठ माह पूर्व नई मशीनें भी मंगा ली गईं, लेकिन विभागीय व्यस्तता के चलते नई वीसीबी मशीनों को स्थापित नहीं कराया जा सका। जिसके कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था काफी खराब हो गई थी। जब गर्मियों की तपन बढ़ने के साथ ही फाल्ट का सिलसिला भी बढ़ने लगा, तो विद्युत अधिकारियों को नई वीसीबी मशीनों को स्थापित कराने की याद आ गई।
बृहस्पतिवार को नई मशीनें स्थापित कराने का निर्णय लिया गया। मशीनें बदल दी गईं, लेकिन मशीनें बदलने से शहर के फीडर नंबर एक व तीन के उपभोक्ताओं को दिन भर बिजली नहीं मिल सकी। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा, देवगढ़ एवं राजघाट फीडर के 84 गांव में भी बिजली नहीं मिलने से लोगों को भीषण गर्मी में परेशान होना पड़ा।
66 केवी लाइन से जुड़े फीडरों की बिजली सुबह से देर शाम तक बंद रहने से शहर के फीडर नंबर एक के मुहल्ला इलाइट चौराहा, रामनगर, वंशीपुरा, पिसनारी, बसंत बिहार कालोनी, झांसीपुरा, अजीतापुरा, सरदारपुरा, लकड़यापुरा, बड़ापुरा, तलैयापुरा, कसाईमंडी एवं फीडर नंबर तीन के तहत आने वाले मुहल्ला गोविंद नगर, नदीपुरा, करीमनगर, नईबस्ती, लेड़ियापुरा और राजघाट फीडर के अंतर्गत आने वाले 24 गांव व देवगढ़ फीडर के 60 गांव की बिजली दिन भर बंद रही।
हालांकि, अब नई मशीनें स्थापित होने से एक ओर जहां काफी हद तक ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिल सकेगी, तो वहीं दूसरी ओर यहां काम कर रहे एसएसओ व अन्य विद्युत कर्मियों को भी कम खतरा रहेगा।